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    सीएम का दावा: UCC बिल इसी सत्र में होगा पास, दिवाली तक लागू करने की तैयारी

    भोपाल: मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार आगामी मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (UCC) को कानूनी रूप देने की पूरी तैयारी कर चुकी है। खुद मुख्यमंत्री ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा है कि आगामी 20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में यूसीसी का ड्राफ्ट विधानसभा में पेश किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि बाबा महाकाल के आशीर्वाद से इसी सत्र में इसे मंजूरी भी मिल जाएगी। उत्तराखंड और गुजरात की तर्ज पर अब मध्य प्रदेश भी इस कानून को अमलीजामा पहनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    इस बीच, सत्तापक्ष के विधायकों ने भी इस कदम का पुरजोर समर्थन किया है। उनका मानना है कि यह पूरे देश की मांग है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है। साथ ही, इसके लागू होने से आबादी के संतुलन और नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।

    ड्राफ्ट तैयार करने के लिए बनाई गई हाई-लेवल कमेटी और जनता की राय

    राज्य सरकार के विधि विभाग ने इस कानून की रूपरेखा तैयार करने के लिए इसी साल 27 अप्रैल को छह सदस्यों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई थी। सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई में काम कर रही इस कमेटी में पूर्व प्रशासनिक अधिकारी और कानूनी व सामाजिक क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।

    समिति ने राज्य के अलग-अलग अंचलों का दौरा कर सभी समुदायों से चर्चा की। नागरिकों की राय जानने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी बनाया गया था, जिस पर 15 मई से 15 जून के बीच सुझाव मांगे गए थे। अभी भी एसएमएस के जरिए लोगों से फीडबैक लिया जा रहा है। गठन के 60 दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के निर्देश के साथ कमेटी अब इस बिल के मसौदे को अंतिम रूप दे रही है। सरकार का लक्ष्य है कि आगामी मानसून सत्र में इसे पास कराकर इस साल दिवाली तक पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाए।

    'लिव-इन रिलेशनशिप' की वैधता पर विपक्ष के तीखे सवाल

    मुख्यमंत्री के बयान पर विपक्षी खेमे से तीखी प्रतिक्रिया आई है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री बाबा महाकाल की कृपा की बात कर रहे हैं, तो महाकाल का आशीर्वाद कभी भी 'लिव-इन रिलेशनशिप' जैसी व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए नहीं हो सकता। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारतीय समाज और संस्कृति के खिलाफ जाने वाले इस शिष्टाचार-विहीन चलन को कानून में मान्यता नहीं दी जाएगी और सभी वर्ग इसका विरोध करेंगे।

    आदिवासियों को छूट देने पर 'समान' कानून के वजूद पर आपत्ति

    विपक्ष ने इस कानून की बुनियादी परिभाषा पर भी घेराबंदी की है। कांग्रेस का कहना है कि जब सरकार इस कानून के दायरे से आदिवासी समाज (ट्राइबल कम्युनिटी) को बाहर रख रही है, तो फिर इसे 'समान' या कॉमन सिविल कोड कैसे कहा जा सकता है? कानून का मतलब सबके लिए एक समान होना चाहिए, जो कि सभी पक्षों की सहमति से ही संभव है। विपक्ष ने साफ किया है कि इस मुद्दे को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में गंभीरता से उठाया जाएगा और सभी की सहमति से सदन के भीतर इस पर साझी रणनीति अपनाई जाएगी।

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