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    जासूसी का बड़ा मामला, मुस्‍ताक अली पर BSF की जानकारी पाकिस्तान भेजने का आरोप

    जैसलमेर। सीमावर्ती जिले जैसलमेर से गिरफ्तार संदिग्ध आईएसआई एजेंट मुस्ताक अली को लेकर सुरक्षा और जांच एजेंसियों की पूछताछ में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, पकड़ा गया यह संदिग्ध पिछले करीब 2 वर्षों से सीमा पार बैठे पाकिस्तानी खुफिया आकाओं के लगातार संपर्क में था। वह भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की रणनीतिक हलचलों, सैन्य ठिकानों की तस्वीरें और गोपनीय वीडियो सरहद पार भेज रहा था। सुरक्षा बलों ने खुफिया इनपुट के आधार पर जैसलमेर के नाचना थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले हिगोला की ढाणी (खारिया) से मुस्ताक को दबोचा था। आरोपी को सक्षम अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 22 जून तक के लिए पुलिस रिमांड पर सौंप दिया गया है। फिलहाल खुफिया एजेंसियां इस पूरे राष्ट्रविरोधी नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं।

    तकनीकी ऐप से अक्षांश-देशांतर भेजना और रिश्तेदारों से मिली जासूसी की ट्रेनिंग

    सीआईडी इंटेलिजेंस की तकनीकी पड़ताल में यह बात सामने आई है कि मुस्ताक अली सैन्य क्षेत्रों की रेकी करने के लिए 'गूगल ऐप कैम' नामक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन का इस्तेमाल करता था। इस एडवांस ऐप की खासियत यह है कि इससे खींची गई तस्वीरों और वीडियो के साथ उस स्थान की सटीक भौगोलिक स्थिति यानी अक्षांश (Latitude) और देशांतर (Longitude) का डेटा भी खुद-ब-खुद अटैच हो जाता था। इस चालाकी के पीछे पाक हैंडलर्स का मकसद यह था कि किसी भी संभावित हवाई या जमीनी हमले की स्थिति में भारतीय ठिकानों को अचूक निशाना बनाया जा सके। जांच में मुस्ताक के फोन से दो पाकिस्तानी नंबर भी मिले हैं, जो वहां को-ऑर्डिनेटर के रूप में काम करने वाले खालिद और नजीर अहमद के हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि नजीर अहमद रिश्ते में मुस्ताक का ममेरा भाई (बुआ का लड़का) है और उसी ने मुस्ताक को देश के खिलाफ जासूसी करने के इस काले धंधे में धकेला था।

    बॉर्डर रोड पर चाय की दुकान खोलने का टास्क और लाइव कैमरे की खतरनाक साजिश

    पूछताछ में एक और सबसे खतरनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है। पाकिस्तानी हैंडलर्स ने मुस्ताक को नाचना क्षेत्र में भारत-पाक सीमा की ओर जाने वाले मुख्य रणनीतिक मार्ग पर एक चाय की दुकान खोलने का विशेष काम (टास्क) सौंपा था। इस दुकान की आड़ में उसका मुख्य काम चाय पीने आने वाले सैनिकों और वहां से गुजरने वाले बीएसएफ व सेना के काफिलों पर नजर रखना था। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यदि समय रहते मुस्ताक को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तो वह उस चाय की दुकान पर एक गुप्त लाइव स्ट्रीमिंग वीडियो कैमरा स्थापित करने की योजना बना चुका था। इस लाइव कैमरे के जरिए सरहद पर होने वाली भारतीय सेना की हर गतिविधि की पल-पल की लाइव फीड और अपडेट सीधे पाकिस्तान में बैठे जासूसी आकाओं तक पहुंचाई जानी थी।

    संदिग्ध डिजिटल वित्तीय लेन-देन और मिलिट्री ऑपरेशन के दौरान जासूसी की आशंका

    वित्तीय जांच के दौरान देश विरोधी इस कृत्य के बदले मुस्ताक के बैंक खाते में यूपीआई (UPI) के माध्यम से 25 से 30 हजार रुपये के संदिग्ध डिजिटल ट्रांजैक्शन होने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। देश की विभिन्न वित्तीय जांच एजेंसियां इस बात का पता लगा रही हैं कि इस रकम को भेजने वाले स्थानीय मददगार कौन हैं। सबसे गंभीर और संवेदनशील कूटनीतिक चिंता की बात यह है कि भारतीय सेना के महत्वपूर्ण 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भी मुस्ताक अली लगातार सीमा पार के हैंडलर्स के साथ खुफिया संपर्क बनाए हुए था। आशंका जताई जा रही है कि इस महत्वपूर्ण सैन्य अभ्यास की कई अति-संवेदनशील और गोपनीय सूचनाएं उसने पाकिस्तान के साथ साझा की होंगी, जिसको लेकर खुफिया विंग गहराई से साक्ष्य जुटाने में व्यस्त है।

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