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    जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश, चाय की थड़ी को बनाया था सैन्य जानकारी लीक करने का अड्डा

    जैसलमेर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर से गिरफ्तार संदिग्ध पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के एजेंट मुस्ताक अली को लेकर सुरक्षा और जांच एजेंसियों की संयुक्त पूछताछ में बेहद सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। सीआईडी इंटेलिजेंस और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की सघन तफ्तीश में यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के समीप मुस्ताक अली द्वारा चलाई जा रही एक साधारण सी दिखने वाली चाय की थड़ी महज आजीविका का साधन नहीं थी, बल्कि यह भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की जासूसी करने के लिए स्थापित किया गया एक सुनियोजित 'सीक्रेट सेंटर' था।

    सैन्य मूवमेंट की निगरानी के लिए चाय दुकान का स्पेशल टास्क और लाइव कैमरे की साजिश

    जांच एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तानी हैंडलर्स ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत मुस्ताक अली को जैसलमेर के नाचना क्षेत्र में सरहद की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर चाय की दुकान खोलने का विशेष जिम्मा सौंपा था। यह वही मुख्य मार्ग है जहां से सेना और बीएसएफ के काफिलों और जवानों का चौबीसों घंटे आवागमन होता है। मुस्ताक को निर्देश दिए गए थे कि वह चाय बेचने के बहाने सुरक्षा बलों की दैनिक गतिविधियों, उनके काफिलों के समय और वाहनों की सटीक संख्या पर पैनी नजर रखे। इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह सामने आई है कि यदि समय रहते मुस्ताक को दबोचा नहीं जाता, तो पाकिस्तानी आकाओं की योजना इस थड़ी पर एक सीक्रेट लाइव वीडियो कैमरा स्थापित करने की थी, ताकि सीमावर्ती क्षेत्र की सामरिक गतिविधियों और सेना के मूवमेंट का सीधा प्रसारण (लाइव अपडेट) सरहद पार बैठे मास्टरमाइंड्स तक पहुंच सके।

    'गूगल ऐप कैम' तकनीक से सामरिक ठिकानों की को-ऑर्डिनेट्स मैपिंग और यूपीआई फंडिंग

    पकड़ा गया आरोपी मुस्ताक अली पिछले करीब 2 वर्षों से सीमा पार के पाकिस्तानी हैंडलर्स के साथ निरंतर डिजिटल संपर्क में था। वह जासूसी के काम को अंजाम देने के लिए 'गूगल ऐप कैम' नामक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग कर रहा था, जिसकी तकनीकी विशेषता यह है कि इससे ली गई तस्वीरों और वीडियो के साथ उस स्थान के सटीक अक्षांश और देशांतर (लेटीट्यूड और लोंगिट्यूड को-ऑर्डिनेट्स) स्वतः ही दर्ज हो जाते हैं। मुस्ताक इसी आधुनिक तकनीक के जरिए भारतीय सैन्य ठिकानों और सामरिक महत्व वाले स्थानों के गुप्त विजुअल्स पाकिस्तान भेज रहा था, ताकि किसी भी तनावपूर्ण परिस्थिति या युद्ध की स्थिति में पाकिस्तानी सेना भारतीय ठिकानों को बिल्कुल सटीक निशाना बना सके। इसके अलावा, जब भारतीय सेना का अत्यंत महत्वपूर्ण 'ऑपरेशन सिंदूर' चल रहा था, तब भी मुस्ताक लगातार जासूसों को संवेदनशील डेटा भेज रहा था, जिसके एवज में उसे यूपीआई (UPI) के माध्यम से 25 से 30 हजार रुपये के संदिग्ध डिजिटल पेमेंट ट्रांसफर किए गए, जिनकी वित्तीय कड़ियों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।

    सगे फुफेरे भाई ने ही बुना जासूसी का जाल और 22 जून तक अदालती रिमांड

    मुस्ताक के जब्त किए गए मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में पाकिस्तान में सक्रिय दो प्रमुख जासूसी को-ऑर्डिनेटरों खालिद और नजीर अहमद के संपर्क नंबर बरामद हुए हैं। इसमें सबसे चौंकाने वाला सच यह उजागर हुआ है कि नजीर अहमद वास्तव में मुस्ताक का सगा फुफेरा भाई (बुआ का बेटा) ही है, जिसने मुस्ताक को पैसों का लालच देकर देशद्रोह के इस दलदल में धकेला था और उसे जासूसी की विशेष ट्रेनिंग भी दी थी। सीआईडी इंटेलिजेंस ने तकनीकी इनपुट के आधार पर जाल बिछाकर मुस्ताक को नाचना क्षेत्र के खारिया स्थित 'हिगोला की ढाणी' से रंगे हाथों गिरफ्तार किया था, जिसके बाद स्थानीय अदालत ने उसे आगामी 22 जून तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। वर्तमान में देश की तमाम खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां मुस्ताक के पूरे नेटवर्क, उसके डिजिटल खातों और क्षेत्र में मौजूद संभावित स्थानीय मददगारों का सुराग लगाने में मुस्तैदी से जुटी हुई हैं।

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