अलवर में श्रुत पंचमी पर्व पर मार्ग दिखाती जिनवाणी की महिमा का हुआ वर्णन
अलवर। स्थानीय स्कीम नंबर 10 स्थित जैन भवन में शुक्रवार को श्रुत पंचमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। समाधिस्थ दिगम्बर जैनाचार्य संत शिरोमणि विद्यासागर महाराज के सुशिष्य मुनि विनम्र सागर महाराज के सानिध्य में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और जिनवाणी के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
अपने मंगल प्रवचन में मुनि विनम्र सागर महाराज ने कहा कि जिनवाणी मनुष्य को संसार के बंधनों से मुक्ति का मार्ग दिखाती है और मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल साधन है। उन्होंने कहा कि जैन शास्त्र केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आत्मकल्याण और आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देने वाले अमूल्य ज्ञान के स्रोत हैं।

उन्होंने कहा कि प्राचीन आचार्यों द्वारा रचित जैन शास्त्र आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और नई पीढ़ी को जैन संस्कृति एवं संस्कारों से जोड़ने का कार्य करते हैं। इसलिए इन दुर्लभ ग्रंथों का संरक्षण करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी उनसे ज्ञान प्राप्त कर सकें।
जैन पत्रकार महासंघ अलवर के जिला संयोजक हरीश जैन ने बताया कि श्रुत पंचमी के अवसर पर आयोजित विधान एवं पूजन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर-नारी शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने जिनेंद्र भगवान की भक्ति के साथ विधान में भाग लेकर अर्घ्य अर्पित किए और धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल श्रीजी के अभिषेक एवं शांतिधारा से हुई। इसके बाद विधान, पूजा-अर्चना और धार्मिक प्रवचनों का आयोजन किया गया। अलवर के अलावा दूर-दराज़ क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिससे जैन भवन परिसर में मेले जैसा वातावरण देखने को मिला।

मुनि विनम्र सागर महाराज ने अपने संदेश में कहा कि धर्म केवल अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला मार्ग है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से जिनवाणी का अध्ययन करने, शास्त्रों के संरक्षण में सहयोग देने और अपने आचरण में जैन मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।
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