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    मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने विद्युत गृहों के निर्बाध संचालन के लिए बनाया तकनीकी निगरानी मॉडल

    भोपाल: मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने अपने ताप (थर्मल) और जल (हाइड्रो) विद्युत गृहों के रखरखाव (ओवरहॉल) के बाद इकाइयों के अधिक सुरक्षित, कुशल और निर्बाध संचालन के लिए एक नई तकनीकी निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने इस पहल को बिजली उत्पादन की विश्वसनीयता को मजबूत करने और नवाचार को बढ़ावा देने वाला एक बड़ा कदम बताया है।

    इस नई तकनीकी व्यवस्था और बिजली उत्पादन से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

    5492 मेगावाट की कुल स्थापित क्षमता

    मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के पास वर्तमान में बिजली उत्पादन का एक बड़ा ढांचा है, जिसकी कुल स्थापित क्षमता 5492 मेगावाट है:

    • ताप विद्युत (Thermal Power): कंपनी के 4 ताप विद्युत गृहों (अमरकंटक-चचाई, सतपुड़ा-सारनी, संजय गांधी-बिरसिंगपुर और श्री सिंगाजी-दोंगलिया) द्वारा कुल 4570 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है।

    • जल विद्युत (Hydro Power): कंपनी के 10 जल विद्युत गृहों (गांधीसागर, पेंच-तोतलाडोह, रानी अवंतीबाई सागर-बरगी, बाण सागर के टोंस, सिलपरा, देवलोंद, झिन्ना, बिरसिंगपुर, राजघाट और मड़ीखेड़ा) द्वारा कुल 915 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है।

    • सौर ऊर्जा (Solar Power): रतागुरडिया ग्राउंड माउंटेड सोलर प्रोजेक्ट से कुल 7 मेगावाट सोलर बिजली का उत्पादन होता है।

    कैसे काम करेगी नई तकनीकी निगरानी व्यवस्था?

    निरीक्षण प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए कंपनी ने एक अनोखा तरीका अपनाया है:

    • समन्वय टीमों का गठन: मुख्यालय और बिजली घरों के अनुभवी व युवा इंजीनियरों को मिलाकर यूनिटवार (Unit-wise) टीमें बनाई गई हैं।

    • क्रॉस-इंस्पेक्शन (Cross-Inspection) नीति: टीम के गठन में यह विशेष ध्यान रखा गया है कि कोई भी इंजीनियर अपनी खुद की यूनिट के ओवरहॉल काम की जांच नहीं करेगा। दूसरी यूनिट के इंजीनियर जांच करेंगे, जिससे निष्पक्षता बनी रहेगी और बेहतर तकनीकी सुझाव मिलेंगे।

    • मुख्य काम: यह टीमें ओवरहॉल कार्यों की प्लानिंग, निरीक्षण और मूल्यांकन की सतत निगरानी करेंगी ताकि किसी भी तकनीकी कमी या परिचालन बाधा की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।

    क्या होती है वार्षिक और पूंजीगत ओवरहॉल प्रक्रिया?

    बिजली पैदा करने वाली मशीनों की कार्यक्षमता और उम्र बढ़ाने के लिए यह रखरखाव प्रक्रिया अपनाई जाती है:

    • वार्षिक ओवरहॉल (Annual Overhaul): यह सामान्यतः हर 1 से 2 साल के अंतराल पर होता है। इसमें जरूरी उपकरणों का निरीक्षण, छोटी-मोटी मरम्मत और खराब पुर्जों को बदला जाता है।

    • पूंजीगत ओवरहॉल (Capital Overhaul): यह एक बेहद विस्तृत और बड़ी तकनीकी प्रक्रिया है, जो 4 से 6 साल के अंतराल पर की जाती है। इसमें मुख्य मशीनों को खोलकर उनकी व्यापक मरम्मत, तकनीक को अपग्रेड (उन्नयन) और सुधार किया जाता है ताकि प्लांट की दक्षता और उम्र बढ़ सके।

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