More
    Homeराजस्थानअलवरनई बिड प्रक्रिया के विरोध में व्यावसायिक प्रशिक्षकों में रोष, स्थायी नीति...

    नई बिड प्रक्रिया के विरोध में व्यावसायिक प्रशिक्षकों में रोष, स्थायी नीति लागू करने की उठी मांग

    ठेका आधारित प्रक्रिया समाप्त कर रोजगार सुरक्षा और पारदर्शी नीति बनाने की अपील

    लक्ष्मणगढ़। राजस्थान में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तावित नई बिड (टेंडर) प्रक्रिया पर नाराजगी जताते हुए स्थायी रोजगार नीति लागू करने की मांग की है। प्रशिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान के बजाय पुनः ठेका आधारित व्यवस्था को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे उनके भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

    प्रशिक्षकों के अनुसार विभिन्न जनप्रतिनिधियों द्वारा मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नाम समर्थन और अनुशंसा पत्र भेजे जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उनका आरोप है कि जिन कंपनियों के माध्यम से पहले से वेतन भुगतान संबंधी समस्याएं सामने आती रही हैं और कई मामलों में कर्मचारियों का भुगतान लंबित रहा है, उन्हीं प्रकार की व्यवस्थाओं को दोबारा लागू करने की तैयारी की जा रही है।

    रोजगार सुरक्षा और शिक्षा गुणवत्ता पर चिंता

    व्यावसायिक प्रशिक्षकों का कहना है कि वर्षों से हजारों प्रशिक्षक अस्थिर रोजगार, समय पर वेतन न मिलने और भविष्य की अनिश्चितता जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उनका मानना है कि कौशल शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए ठेका आधारित मॉडल के बजाय स्थायी और पारदर्शी व्यवस्था अपनाई जानी चाहिए।

    प्रशिक्षकों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि पूर्व में न्यायिक और विभागीय स्तर पर कुछ व्यवस्थाओं को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं, तो वर्तमान बिड प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। उनका कहना है कि सरकार को दीर्घकालिक नीति बनाकर व्यावसायिक शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करना चाहिए।

    आंदोलन और कानूनी विकल्प की चेतावनी

    व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं किया गया तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन और जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। आवश्यक होने पर न्यायालय की शरण लेने पर भी विचार किया जाएगा।

    प्रशिक्षकों का कहना है कि एक ओर सरकार “कौशल भारत–कुशल भारत” का लक्ष्य लेकर युवाओं को कौशल विकास के लिए प्रेरित कर रही है, वहीं दूसरी ओर कौशल शिक्षा देने वाले प्रशिक्षकों को ठेका व्यवस्था के माध्यम से अस्थिर परिस्थितियों में कार्य करना पड़ रहा है। उनका मानना है कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और प्रशिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए स्थायी नीति बनाना समय की आवश्यकता है।

    मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
    https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1

    अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क

    https://missionsach.com/category/india

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here