चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में नए बड़े समीकरण बनने के संकेत मिल रहे हैं। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) की लंबे समय से बेहद भरोसेमंद सहयोगी रही इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने आधिकारिक रूप से डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) से अलग होने का बड़ा फैसला कर लिया है। इस अचानक आए सियासी मोड़ के बाद अब राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा बेहद तेज हो गई है कि क्या डीएमके भविष्य में केंद्र की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बन सकती है। चेन्नई में आयोजित आईयूएमएल की जनरल काउंसिल की बैठक में पार्टी ने कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए, जिसमें डीएमके गठबंधन से अपना नाता तोड़ने का निर्णय मुख्य था। पार्टी नेतृत्व का साफ कहना है कि राज्य की बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए ही यह कदम उठाया गया है।
टीवीके सरकार को समर्थन बना गठबंधन टूटने की वजह
आईयूएमएल ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद उसने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार को अपना समर्थन दिया था। पार्टी के अनुसार, यह निर्णय किसी निजी राजनीतिक फायदे के लिए नहीं बल्कि राज्य में एक मजबूत राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया था। पार्टी अध्यक्ष केएम खादर मोहिदीन ने माना कि डीएमके गठबंधन के साथ रहते हुए आईयूएमएल को विधानसभा, लोकसभा और स्थानीय निकाय चुनावों में शानदार सफलता मिली थी, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए अब नए और स्वतंत्र राजनीतिक फैसले लेना बेहद आवश्यक हो गया था। बाद में पार्टी विधायक ए.एम. शाहजहां को नई सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बनाए जाने से भी इन दोनों दलों के बीच दूरियां बढ़ती चली गईं।
कैसे बनी थी टीवीके सरकार और क्या है नया गणित
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर जरूर उभरी थी, लेकिन वह अपने दम पर पूर्ण बहुमत का जादुई आंकड़ा नहीं छू सकी थी। इसके बाद कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, वीसीके और आईयूएमएल समेत कई अन्य प्रमुख दलों ने आगे आकर समर्थन दिया और राज्य में सरकार गठन का रास्ता साफ किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पहले कांग्रेस का टीवीके के साथ जाना और अब आईयूएमएल का डीएमके गठबंधन से पूरी तरह अलग हो जाना राज्य की विपक्षी राजनीति में एक बहुत बड़े पुनर्गठन और नए मोर्चे के गठन का साफ संकेत है।
क्या एनडीए की ओर बढ़ रही है डीएमके?
आईयूएमएल के गठबंधन से बाहर होने के बाद सबसे ज्यादा सुगबुगाहट डीएमके की संभावित राजनीतिक दिशा को लेकर हो रही है। सियासी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार संसद में अपने भविष्य के बड़े विधायी एजेंडे और महत्वपूर्ण कानूनों को आगे बढ़ाने के लिए नए सहयोगी दलों का दायरा बढ़ाने पर लगातार विचार कर रही है। इसी कड़ी में डीएमके और एनडीए के बीच संभावित नजदीकियों की अटकलें तेजी से लगाई जा रही हैं। लोकसभा में डीएमके के पास 22 सांसद हैं, ऐसे में यदि पार्टी भविष्य में एनडीए का हिस्सा बनती है तो सत्तारूढ़ गठबंधन की ताकत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की सरकार की रणनीति को भारी मजबूती मिलेगी।
फिलहाल आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
हालांकि, डीएमके के एनडीए में शामिल होने की इन अटकलों को लेकर अभी तक न तो डीएमके के शीर्ष नेतृत्व और न ही भाजपा की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान या पुष्टि सामने आई है। फिलहाल यह पूरी चर्चा केवल राजनीतिक सूत्रों के दावों और कयासों तक ही सीमित है। लेकिन आईयूएमएल के इस बड़े फैसले के बाद इतना तो तय है कि तमिलनाडु की धरती पर आने वाले दिनों में एक नई राजनीतिक पटकथा लिखी जा सकती है।


