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    स्कूल बस में बड़ा फर्जीवाड़ा! बाइक का नंबर लगाकर चल रही थी गाड़ी, दो दबोचे गए

    कोटपूतली-बहरोड़। जिले के मांढण थाना इलाके में स्कूली छात्र-छात्राओं की सुरक्षा से खिलवाड़ करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने जाली नंबर प्लेट और संदिग्ध दस्तावेजों के जरिए चलाई जा रही एक स्कूल बस को पकड़ा है। इस मामले में तत्परता दिखाते हुए पुलिस ने स्कूल के डायरेक्टर समेत दो लोगों को हिरासत में लिया है। यह बस मासूम बच्चों को घर से स्कूल लाने और ले जाने के काम में धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रही थी, जिससे नौनिहालों की जान जोखिम में पड़ी हुई थी। जिला पुलिस कप्तान के निर्देश पर जारी धरपकड़ अभियान के तहत स्थानीय पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए वांछित स्कूल संचालक पवन कुमार और प्रदीप कुमार को धर दबोचा।

    परिवहन विभाग के औचक निरीक्षण में खुली धांधली की पोल

    इस पूरे गोरखधंधे का भंडाफोड़ परिवहन विभाग की मुस्तैदी से हुआ। दरअसल, उप परिवहन कार्यालय के उड़नदस्ते ने नगली बलाहीर स्थित संस्कार भारती (मेक विजन उच्च माध्यमिक विद्यालय) में बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों की औचक चेकिंग की थी। इस दौरान वहां मौजूद एक स्कूल बस पर दर्ज नंबर को देखकर अधिकारियों को शक हुआ। जब उस नंबर की ऑनलाइन जांच की गई तो वह किसी बस का नहीं, बल्कि एक मोटरसाइकिल का निकला। हद तो तब हो गई जब अधिकारियों ने बस का चेसिस नंबर चेक किया, लेकिन परिवहन विभाग के सरकारी डेटाबेस में उसका कोई भी वैध ब्योरा उपलब्ध नहीं था।

    दस्तावेज न मिलने पर बस सीज और जालसाजी का मुकदमा दर्ज

    जांच टीम ने धोखाधड़ी पकड़े जाने के तुरंत बाद अवैध रूप से चल रही इस बस को अपनी कस्टडी में लेकर शाहजहांपुर स्थित सरकारी यार्ड में बंद करवा दिया। इसके बाद विभाग की तरफ से स्कूल प्रबंधन से बस के असली कागजात और फिटनेस सर्टिफिकेट पेश करने को कहा गया। कई बार मौका दिए जाने के बावजूद स्कूल संचालक वाहन से जुड़े कोई भी संतोषजनक दस्तावेज नहीं दिखा सका। इसके बाद विभाग की शिकायत पर स्थानीय पुलिस ने जालसाजी, फर्जी दस्तावेज बनाने और धोखाधड़ी करने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

    सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर पुलिस की सख्त पड़ताल शुरू

    पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण इसकी बेहद बारीकी से तहकीकात की जा रही है। रिमांड के दौरान आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है कि वे इस फर्जी नंबर वाली बस को कितने समय से सड़क पर दौड़ा रहे थे और इसके पीछे परिवहन विभाग या किसी अन्य स्तर पर कौन से लोग शामिल थे। पुलिस इस बात का भी पता लगा रही है कि कहीं इस तरह के और भी संदिग्ध वाहन क्षेत्र के अन्य स्कूलों में बच्चों की जिंदगी को खतरे में तो नहीं डाल रहे हैं।

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