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    EWS आरक्षण में सुधार की मांग को लेकर अलवर में संवाद कार्यक्रम आयोजित

    सामाजिक संगठनों ने आरक्षण मानदंडों को अधिक व्यावहारिक और समावेशी बनाने की उठाई मांग

    अलवर। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों और पात्रता मानदंडों पर चर्चा के लिए अलवर स्थित लोटस गार्डन (ब्राह्मण हॉस्टल) में EWS जन जागृति मंच द्वारा विचार गोष्ठी एवं प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर EWS आरक्षण व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।

    कार्यक्रम में ब्राह्मण महासभा, राजपूत सभा, वैश्य महासभा, पुरुषार्थी समाज, विप्र फाउंडेशन, राजपूत युवा परिषद, कायस्थ सभा सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

    पात्रता शर्तों में संशोधन की मांग

    EWS जन जागृति मंच के प्रतिनिधि धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए लागू 10 प्रतिशत आरक्षण एक महत्वपूर्ण कदम रहा है, लेकिन वर्तमान पात्रता शर्तों के कारण कई जरूरतमंद परिवार इसका लाभ प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं।

    उन्होंने कहा कि सरकारी भर्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में EWS वर्ग की अपेक्षाकृत कम भागीदारी यह संकेत देती है कि पात्रता मानदंडों की समीक्षा की आवश्यकता है। उन्होंने विशेष रूप से कृषि भूमि से संबंधित शर्तों को वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाने की मांग की।

    केंद्र और राज्य की व्यवस्थाओं में अंतर पर चर्चा

    कार्यक्रम में योगेश मिश्रा ने केंद्र और राजस्थान सरकार की EWS व्यवस्था के बीच विभिन्न प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई मामलों में राज्य सरकार ने अधिक व्यावहारिक छूट प्रदान की है। उन्होंने आयु सीमा, प्रमाण पत्र की वैधता, छात्रवृत्ति सहायता तथा भूमि संबंधी नियमों में एकरूपता लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि पात्रता संबंधी नियमों को सरल और स्पष्ट बनाया जाए ताकि वास्तविक लाभार्थियों को आरक्षण का लाभ सहज रूप से मिल सके।

    नीति को अधिक समावेशी बनाने की मांग

    विचार गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने मांग की कि EWS आरक्षण में भूमि एवं आवास से संबंधित कुछ पात्रता शर्तों की समीक्षा की जाए तथा व्यवस्था को अधिक समावेशी और व्यावहारिक बनाया जाए। साथ ही सभी पात्र वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए नीति में आवश्यक सुधार किए जाएं।

    बड़ी संख्या में सामाजिक प्रतिनिधि रहे मौजूद

    कार्यक्रम में विशंभर दयाल वशिष्ठ, गोपाल सिंह नरुका, कृष्ण मुरारी गंगावत, नरेंद्र सिंह, अशोक खन्ना, बिजेंद्र चौहान, आनंद शर्मा, आशीष भाल, प्रकाश गंगावत, रिपुदमन गुप्ता, मानवेन्द्र सिंह, महेंद्र गोयल, के.के. खंडेलवाल सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित रहे।

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