मोक्ष कल्याणक महोत्सव में भगवान आदिनाथ के जयघोष, विश्व शांति महायज्ञ में की गई कल्याण की कामना
लक्ष्मणगढ़। संत आचार्य ज्ञानभूषण जी महाराज के ससंघ सान्निध्य में लक्ष्मणगढ़ कस्बे में पिछले पांच दिनों से चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव का शुक्रवार को मोक्ष कल्याणक के आयोजन के साथ भव्य समापन हो गया। अंतिम दिन भगवान आदिनाथ के जयघोषों से पूरा परिसर गुंजायमान रहा तथा विश्व शांति महायज्ञ में समस्त मानवता के कल्याण और सुख-समृद्धि की कामना की गई।

महोत्सव के दौरान भव्य रथ यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बैंड-बाजों और धार्मिक जयघोषों के बीच निकली शोभायात्रा के साथ नवीन मंदिर में भगवान की प्रतिमा स्थापना का कार्यक्रम भी वैदिक एवं जैन मंत्रोच्चार के मध्य संपन्न हुआ।
मोक्ष कल्याणक के अवसर पर तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के समस्त कर्मों से मुक्त होकर सिद्धशिला पर विराजमान होने के पावन प्रसंग का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। प्रातःकाल जिनाभिषेक, शांतिधारा और विशेष पूजन के साथ धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। आयोजन स्थल पर कैलाश पर्वत की प्रतीकात्मक संरचना भी तैयार की गई, जहां भगवान आदिनाथ के निर्वाण की स्मृति में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
पंचकल्याणक महोत्सव के अध्यक्ष अशोक कुमार जैन अगोनिज ने बताया कि पंचकल्याणक जैन धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन है, जो आत्मा से परमात्मा बनने की आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक माना जाता है। इसके अंतर्गत गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान और मोक्ष—इन पांच कल्याणकों का उत्सवपूर्वक आयोजन किया जाता है।
आचार्य ज्ञानभूषण जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दिन-रात, सुख-दुख, स्त्री-पुरुष और पुण्य-पाप एक-दूसरे के पूरक हैं, उसी प्रकार संसार के साथ मोक्ष, स्वर्ग के साथ नरक का अस्तित्व भी स्वीकार्य है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
महोत्सव के समापन पर श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, सामाजिक सद्भाव और मानव कल्याण की मंगलकामनाओं के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।
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