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    10वीं तक पुराने भाषा नियम जारी, CBSE ने छात्रों को दी बड़ी राहत

    नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। शिक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, वर्तमान शैक्षणिक सत्र में सातवीं, आठवीं और नौवीं कक्षा में पढ़ रहे जिन विद्यार्थियों ने तीन-भाषा फॉर्मूले के अंतर्गत दो विदेशी भाषाओं को चुना है, वे दसवीं कक्षा तक बिना किसी बदलाव के इसी संयोजन (कॉम्बिनेशन) के साथ अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगे। सरकार के इस कदम से उन हजारों छात्रों को बड़ी राहत मिली है, जो बीच सत्र में अपने विषय बदले जाने की आशंका से परेशान थे।

    नए नियम आगामी बैचों पर होंगे लागू

    मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि तीन-भाषा नीति के तहत कम से कम दो भारतीय भाषाओं को पढ़ने की जो अनिवार्यता तय की गई है, उसे पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि वर्तमान में पढ़ रहे छात्रों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। यह नई व्यवस्था पूरी तरह से भविष्य के बैचों के लिए होगी और इसे कक्षा 6 (छठी) से चरणबद्ध तरीके से अमल में लाया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला किसी नीतिगत यू-टर्न या सरकार के पीछे हटने का संकेत नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद प्रावधान को लेकर पैदा हुए भ्रम को दूर करने के लिए केवल एक जरूरी स्पष्टीकरण जारी किया गया है।

    सीमित संख्या में प्रभावित होंगे छात्र

    आंकड़ों के नजरिए से देखें तो सीबीएसई की दसवीं बोर्ड परीक्षा में हर साल तकरीबन 24 लाख विद्यार्थी बैठते हैं। इनमें से मात्र 30 हजार के आसपास ही ऐसे छात्र होते हैं जो दो विदेशी भाषाओं का विकल्प चुनते हैं। प्रतिशत के लिहाज से देखा जाए तो लगभग 18.5 फीसदी छात्र पहले से ही तीन-भाषा नीति के तहत भारतीय भाषाओं की पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में सरकार के इस ताजा स्पष्टीकरण का मुख्य फायदा महानगरों और बड़े शहरी इलाकों के उन चुनिंदा छात्रों को मिलेगा, जिन्होंने अपनी रुचि के हिसाब से विदेशी भाषाओं का चयन किया था।

    सर्कुलर और अदालती विवाद की पृष्ठभूमि

    इस पूरे विवाद की शुरुआत मई 2026 में सीबीएसई द्वारा जारी एक सर्कुलर के बाद हुई थी, जो राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के दिशानिर्देशों पर आधारित था। उस आदेश में कहा गया था कि सत्र 2026-27 से नौवीं कक्षा में आने वाले छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाओं का होना लाजमी था। इस नियम के सामने आते ही अभिभावकों और छात्रों के बीच असंतोष फैल गया और मामला देश की शीर्ष अदालत तक पहुंच गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस नीति पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार करते हुए याचिकाओं को पहले से लंबित मामलों के साथ संबद्ध करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद अब मंत्रालय ने खुद आगे आकर छात्रों की चिंताओं को शांत किया है।

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