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    ओंकारेश्वर मंदिर प्रशासन का बड़ा फैसला, शीघ्र दर्शन टिकट 4000 से बढ़ाकर 6000 किए

    खंडवा। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर मंदिर में आने वाले भक्तों की लगातार बढ़ती तादाद को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंधन ने 'शीघ्र दर्शन' (वीआईपी दर्शन) व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव किया है। मंदिर प्रशासन ने प्रतिदिन जारी होने वाले शीघ्र दर्शन पास की संख्या में 2,000 की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। इस नए फैसले के लागू होने से अब हर रोज दो हजार अतिरिक्त श्रद्धालु कम समय में भगवान भोलेनाथ के सुलभ दर्शन कर सकेंगे, जिससे यहां आने वाले तीर्थयात्रियों को काफी सहूलियत होगी।

    अब रोजाना छह हजार भक्त कर सकेंगे शीघ्र दर्शन

    ओंकारेश्वर मंदिर में अब तक प्रतिदिन केवल 4,000 श्रद्धालुओं को ही शीघ्र दर्शन के टिकट जारी किए जाते थे। अब इसमें 2,000 की वृद्धि होने के बाद कुल टिकटों की संख्या बढ़कर 6,000 हो गई है। यह नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता के अनुसार, मंदिर में उमड़ रही भारी भीड़ को देखते हुए इंटरनेट के माध्यम से प्रतिदिन 2,000 अतिरिक्त ऑनलाइन टिकट जारी करने का फैसला लिया गया है। इससे श्रद्धालु पहले से ही अपनी बुकिंग कराकर तय समय पर दर्शन कर सकेंगे, जिससे आम दर्शनार्थियों की कतारों में लगने वाली भीड़ और दबाव को कम करने में भी मदद मिलेगी।

    व्यवस्था में बदलाव से मंदिर की आय में होगी बढ़ोतरी

    ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में शीघ्र दर्शन के लिए प्रत्येक श्रद्धालु को 300 रुपये का शुल्क देना होता है। पहले जहां 4,000 टिकटों की बिक्री से मंदिर ट्रस्ट को प्रतिदिन 12 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता था, वहीं अब टिकटों की संख्या बढ़कर 6,000 होने से यह दैनिक आय बढ़कर 18 लाख रुपये हो जाएगी। इसके अतिरिक्त, मंदिर प्रशासन को अन्य श्रेणियों के वीआईपी और विशेष पासों के माध्यम से भी प्रतिदिन लगभग 3 लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है। इस प्रकार इस नई व्यवस्था से मंदिर के खजाने में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाएगी।

    सुचारु दर्शन व्यवस्था का स्थानीय स्तर पर स्वागत

    मंदिर के इस निर्णय का स्थानीय पुरोहितों और तीर्थ पुरोहित संघ ने पुरजोर स्वागत किया है। स्थानीय पुजारी पंडित नीलेश पुरोहित ने बताया कि देश के कोने-कोने और दूर-दराज के राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक बेहद कल्याणकारी कदम है। इससे यात्रियों को लंबे समय तक कतारों में परेशान नहीं होना पड़ेगा और वे समय पर दर्शन कर अपनी यात्रा पूरी कर सकेंगे। इसके साथ ही मंदिर परिसर के भीतर की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था भी पहले की तुलना में कहीं अधिक सुचारु, अनुशासित और व्यवस्थित रूप से संचालित हो सकेगी।

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