नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश की आंतरिक सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी महेश दीक्षित को देश की शीर्ष खुफिया एजेंसी 'इंटेलिजेंस ब्यूरो' (आईबी) का नया निदेशक नियुक्त किया है। आंध्र प्रदेश कैडर के 1993 बैच के बेहद अनुभवी अधिकारी दीक्षित वर्तमान में इसी ब्यूरो में विशेष निदेशक (स्पेशल डायरेक्टर) के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के ऐतिहासिक निर्णय से पूर्व की जटिल रणनीतिक तैयारियों और उसके बाद राज्य में अमन-चैन का माहौल बनाए रखने में उनकी अत्यंत सराहनीय भूमिका रही है। इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस दौर में छिड़े 'सूचना युद्ध' (इंफॉर्मेशन वॉरफेयर) के बीच संवेदनशील 'खुफिया ऑपरेशनों' को सफलतापूर्वक अंजाम देने में उन्हें महारत हासिल है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फैलाए जाने वाले भ्रामक संदेशों, फेक न्यूज और अफवाहों से राष्ट्रीय सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था को उत्पन्न होने वाले खतरों को समय रहते नाकाम करने में वे बेहद कुशल माने जाते हैं।
घाटी में शांति की स्थापना, युवाओं की मुख्यधारा में वापसी और आईएसआई के प्रोपेगैंडा पर प्रहार
जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में महेश दीक्षित की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उन्होंने मुख्यधारा से भटके हुए स्थानीय युवाओं को वापस जोड़ने के लिए केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन के मध्य एक मजबूत कूटनीतिक सेतु के रूप में कार्य किया। घाटी के पत्थरबाजों की प्रभावी काउंसलिंग कर उन्हें कट्टरपंथी व सीमा पार के आतंकी संगठनों से दूर करने में उन्हें अभूतपूर्व सफलता मिली, जिसके परिणामस्वरूप आज कश्मीर में पथराव की घटनाएं पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। उनके कुशल मार्गदर्शन का ही प्रभाव है कि जम्मू-कश्मीर में स्थानीय आतंकियों की सक्रिय संख्या घटकर अब दहाई के आंकड़े (दस से कम) के नीचे आ गई है, और वहां छिपे लगभग चार दर्जन आतंकी केवल सीमा पार से घुसपैठ कर आए विदेशी तत्व हैं। इसके अतिरिक्त, दीक्षित पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी 'आईएसआई' की उन तमाम चालों और सोशल मीडिया प्रोपेगैंडा से अच्छी तरह वाकिफ हैं जिसके जरिए वह भारत विरोधी एजेंडा चलाती है। वर्ष 2023 में जब श्रीनगर में 'जी20 टूरिज्म वर्किंग ग्रुप' की बैठक को लेकर वैश्विक स्तर पर शंकाएं जताई जा रही थीं, तब दीक्षित की अचूक सुरक्षा और खुफिया प्लानिंग के बदौलत ही वह अंतरराष्ट्रीय आयोजन निर्विघ्न संपन्न हुआ था।
ब्यूरो की त्याग व समर्पण की गौरवशाली परंपरा और वैश्विक पहचान दिलाने का संकल्प
इंटेलिजेंस ब्यूरो को दुनिया की सबसे उत्कृष्ट और 'सीक्रेट' खुफिया एजेंसियों की अग्रिम कतार में स्थापित करना नए आईबी चीफ के कार्यकाल की मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, आईबी की अद्वितीय कार्यपद्धति, निरंतर सतर्कता, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और सफलता का श्रेय स्वयं न लेकर पृष्ठभूमि में रहकर देश की सेवा करने की त्याग व समर्पण की परंपरा ने ही भारत की एकता और अखंडता को हमेशा अक्षुण्ण रखा है। पिछले एक दशक में इस आसूचना ब्यूरो की कार्यकुशलता, तीक्ष्णता और वांछित परिणाम देने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। बदलते वैश्विक परिदृश्य और आधुनिक कूटनीतिक चुनौतियों के बीच, बेहद कठिन और विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए इस एजेंसी ने देश की सीमाओं और आंतरिक ताने-बाने को पूरी तरह सुरक्षित रखने का अपना दायित्व बखूबी निभाया है।
ऐतिहासिक बजटीय आवंटन, आधुनिक तकनीक और मैक का जिला स्तर तक विस्तार
आंतरिक सुरक्षा तंत्र को अत्याधुनिक तकनीकी संसाधनों से लैस करने के लिए इस बार के केंद्रीय बजट में इंटेलिजेंस ब्यूरो के वित्तीय कोष में 2,889 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है। इसके तहत आईबी का बजट, जो वर्ष 2023-24 में 3,268.94 करोड़ रुपये और 2024-25 में 3,823.83 करोड़ रुपये था, उसे चालू बजट में बढ़ाकर कुल 6,782.43 करोड़ रुपये मंजूर किया गया है। नए निदेशक महेश दीक्षित का मुख्य फोकस हाइब्रिड आतंकवाद से निपटने, मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) का जिला स्तर तक विस्तार करने, सभी सुरक्षा बलों के बीच खुफिया सूचनाओं के त्वरित व रीयल-टाइम आदान-प्रदान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के अनुप्रयोग और डेटा एनालिटिक्स की गुणवत्ता सुधारने पर रहेगा। इसके साथ ही, टेरर फंडिंग (आतंकवाद के वित्तपोषण) पर पूरी तरह लगाम कसने, क्रिप्टो करेंसी जैसी नई तकनीकी चुनौतियों से निपटने, देश के सुदूर द्वीपीय हिस्सों व दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में स्वतंत्र सुरक्षित नेटवर्क का जाल बिछाने और इंटेलिजेंस फ्यूजन सेंटर (आईएफसी) के आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित 500 करोड़ रुपये की योजनाओं को धरातल पर उतारने के काम में तेजी आने की पूरी उम्मीद है।


