गया: बिहार के गया जिले के अंतर्गत आने वाले शहमीर तकिया इलाके में रहने वाला अजय कुमार गुप्ता का परिवार इन दिनों समूचे क्षेत्र में अद्वितीय प्रेरणा, कड़े अनुशासन और पारिवारिक एकजुटता की एक अनूठी मिसाल बनकर उभरा है। रेलवे मेल सर्विस (आरएमएस) के पद से गरिमामय सेवानिवृत्ति प्राप्त करने वाले अजय कुमार गुप्ता के तीनों बच्चों ने देश के प्रतिष्ठित सरकारी क्षेत्रों में उच्च पदों पर चयनित होकर अपने माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
इसी कड़ी में परिवार के सबसे छोटे सुपुत्र कुमार अमन ने हाल ही में घोषित हुए 70वीं बीपीएससी (बिहार लोक सेवा आयोग) के परीक्षा परिणामों में शानदार सफलता अर्जित करते हुए 'राजस्व अधिकारी' (रेवेन्यू ऑफिसर) का गौरवशाली पद हासिल किया है, जिससे इस परिवार की ख्याति और दोगुनी हो गई है।
तीनों भाई-बहन प्रतिष्ठित पदों पर आसीन, गया से लेकर गुजरात तक जमाई धाक
अजय कुमार गुप्ता के घर में सरकारी नौकरियों की यह त्रिवेणी किसी चमत्कार से कम नहीं है। उनके सबसे बड़े बेटे कुमार अभिषेक वर्तमान में गया जिले के ही वजीरगंज स्थित बैंक ऑफ इंडिया (BOI) की शाखा में बतौर असिस्टेंट ब्रांच मैनेजर (सहायक शाखा प्रबंधक) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
वहीं, उनकी इकलौती बेटी भी बैंकिंग सेक्टर में अपनी योग्यता साबित करते हुए गुजरात में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के अंतर्गत जूनियर एसोसिएट के महत्वपूर्ण पद पर पूरी निष्ठा से कार्यरत हैं। अब सबसे छोटे बेटे कुमार अमन के बिहार प्रशासनिक सेवा में अधिकारी बनने की खबर से पूरे मोहल्ले और रिश्तेदारों में जश्न का माहौल है।
आईआईटी रुड़की से बीटेक का सफर, वर्तमान में कोलकाता एयरपोर्ट पर संभाल रहे कमान
शुरुआत से ही मेधावी रहे कुमार अमन की शैक्षणिक यात्रा बेहद शानदार रही है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा गया से ही पूरी की, जिसके बाद वे देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कोटा (राजस्थान) चले गए। अपनी कुशाग्र बुद्धि के बल पर उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) में दाखिला पा लिया।
वहां से इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक कॉर्पोरेट यानी निजी क्षेत्र की नामी कंपनी में नौकरी भी की। इसके बाद उनका चयन विमानन क्षेत्र में हो गया और वर्तमान में वे कोलकाता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बेहद जिम्मेदारी वाले पद 'एयर ट्रैफिक कंट्रोल' (ATC) ऑफिसर के रूप में देश सेवा कर रहे हैं। इस बड़ी जिम्मेदारी को निभाते हुए भी उनका झुकाव सिविल सर्विसेज की तरफ रहा और उन्होंने नौकरी के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखकर बीपीएससी की परीक्षा भी पहले ही प्रयास में निकाल ली।
कठिन ड्यूटी के बाद रोजाना 2 से 3 घंटे की नियमित पढ़ाई ने दिलाया मुकाम
अपनी इस शानदार सफलता की रणनीति साझा करते हुए नवनियुक्त राजस्व अधिकारी कुमार अमन ने बताया कि एक एयर ट्रैफिक कंट्रोलर की नौकरी मानसिक रूप से बेहद तनावपूर्ण और बड़ी जवाबदेही वाली होती है, जहां जरा सी चूक की कोई गुंजाइश नहीं होती। ऐसी व्यस्त और शिफ्ट वाली ड्यूटी के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
वे रोजाना दफ्तर से लौटने के बाद अपनी थकान को दरकिनार कर पूरी एकाग्रता के साथ दो से तीन घंटे नियमित रूप से किताबों के साथ बिताते थे। समय प्रबंधन (टाइम मैनेजमेंट) की इसी कला और सीमित समय के शत-प्रतिशत सही उपयोग के दम पर उन्होंने बीपीएससी जैसी कठिन और स्तरीय परीक्षा में यह स्वर्णिम सफलता अर्जित की है।
सामूहिक पढ़ाई और पारिवारिक टीमवर्क बना सफलता की असली कुंजी
कुमार अमन के बड़े भाई कुमार अभिषेक ने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि उनके घर में शुरू से ही पढ़ाई का एक बेहद सकारात्मक माहौल था। तीनों भाई-बहन कभी अलग-अलग होकर नहीं, बल्कि हमेशा एक टीम की तरह मिलकर पढ़ाई करते थे। स्कूल और कॉलेज के दिनों में यदि किसी को भी किसी विषय या थ्योरी को समझने में कोई कठिनाई आती थी, तो तीनों एक साथ बैठकर गहन चर्चा करते थे और मिलकर उसका हल निकालते थे।
बचपन का यही टीमवर्क, आपसी सहयोग और घर का सख्त अनुशासन आज उन तीनों को जीवन के अलग-अलग मोर्चों पर शीर्ष सरकारी अधिकारी बनाने में सबसे बड़ा मददगार साबित हुआ है।
माता-पिता के त्याग और संस्कारों का सुखद परिणाम
इस गौरवमयी उपलब्धि पर भावुक होते हुए पिता अजय कुमार गुप्ता ने बताया कि उन्होंने अपने दोनों बेटों को गया के क्रेन मेमोरियल स्कूल से और बेटी को डीएवी कैंट एरिया स्कूल से उच्च संस्कारयुक्त शिक्षा दिलाई। उन्होंने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपनी अर्धांगिनी अनीता गुप्ता को दिया, जिन्होंने अजय कुमार की नौकरी के व्यस्त समय के बीच बच्चों की पढ़ाई, उनके खान-पान और उत्तम परवरिश की पूरी कमान अकेले अपने हाथों में संभाली थी। आज पूरा गुप्ता परिवार बच्चों की इस त्रिकोणीय सफलता को अपनी बरसों की तपस्या, माता-पिता के त्याग और सनातनी संस्कारों का सबसे मीठा परिणाम मान रहा है।


