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    दद्दा घाट हादसा: एक साथ निकला 3 दोस्तों का जनाजा, गम में डूबा पूरा इलाका

    जबलपुर: संस्कारधानी के मुजावर मोहल्ले से शनिवार को नर्मदा नदी के दद्दा घाट पर पिकनिक मनाने गए तीन किशोरों की गहरे पानी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। इस हृदयविदारक हादसे के बाद मृतकों के शोकाकुल परिजनों ने घाट पर मौजूद लोगों पर बेहद गंभीर और झकझोर देने वाले आरोप लगाए हैं। पीड़ित परिवारों का कहना है कि जब उनके बच्चे नदी की लहरों के बीच जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे, तब किनारे पर खड़े नाविकों और गोताखोरों से उन्हें बचाने की गुहार लगाई गई थी। लेकिन वहां मौजूद लोगों का दिल नहीं पसीजा और उन्होंने लड़कों को पानी से बाहर निकालने के एवज में पहले पैसों की मांग रख दी। चंद रुपयों के लालच और समय पर मदद न मिलने की वजह से तीनों किशोरों ने पानी में ही दम तोड़ दिया, जिससे अब पूरे इलाके में भारी आक्रोश है।

    छुट्टी का जश्न मातम में बदला, एक-दूसरे को बचाने में डूबे तीन दोस्त

    यह पूरी घटना मोहर्रम की छुट्टी के दिन शुरू हुई थी, जब मुजावर मोहल्ला इलाके में रहने वाले आठ जिगरी दोस्त बाइकों पर सवार होकर नहाने के लिए नर्मदा नदी के दद्दा घाट पहुंचे थे। नदी में नहाने के दौरान सोहिल अचानक गहरे पानी की तरफ चला गया और तेज बहाव में बहने लगा। अपने दोस्त को डूबता देख उसे बचाने के लिए साहिल और साबिर ने भी बिना सोचे-समझे आगे हाथ बढ़ाया, लेकिन पानी का स्तर और बहाव इतना तेज था कि देखते ही देखते तीनों दोस्त गहरे पानी के भंवर में समा गए। किनारे पर खड़े उनके बाकी साथियों में चीख-पुकार मच गई और वे मदद के लिए दौड़ पड़े, पर जब तक तीनों को पानी से बाहर निकाला गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

    हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते रहे साथी, पर रुपयों के आगे हारी इंसानियत

    मृतक साबिर उर्फ राजा के बेबस पिता ने रोते हुए बताया कि जब बच्चे डूब रहे थे, तो उनके साथ गए अन्य लड़के भागकर घाट पर मौजूद नाव चालकों के पास पहुंचे थे। बच्चों ने नाविकों के सामने हाथ जोड़कर मिन्नतें की थीं कि पहले उनके दोस्तों की जान बचा ली जाए, पैसे उनके माता-पिता आकर दे देंगे। इसके बावजूद वहां खड़े पत्थर दिल लोगों ने तुरंत नदी में छलांग लगाने से मना कर दिया और पैसों की जिद पर अड़े रहे। मारे गए साहिल, सोहिल और साबिर की उम्र महज 16 से 18 वर्ष के बीच थी और वे बेहद गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते थे। सबसे बड़ा दुख यह है कि ये तीनों किशोर अपने-अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे, जिनके चले जाने से तीनों घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझ गए हैं।

    एक साथ उठी तीन अर्थियां, एक ही कब्रिस्तान में दी गई अंतिम विदाई

    रविवार की शाम को मुजावर मोहल्ले से जब इन तीनों पक्के दोस्तों का जनाजा एक साथ निकला, तो पूरे शहर का दिल दहल उठा। इस गमगीन अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए और हर किसी की आंखें नम थीं। तीनों दोस्तों को सूपाताल कब्रिस्तान में एक-दूसरे के बिल्कुल बगल में सुपुर्द-ए-खाक किया गया, मानो मौत भी उनकी दोस्ती को अलग नहीं कर सकी। इस दर्दनाक विदाई के दौरान मां-बाप और मोहल्ले के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था। इधर मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएसपी आशीष जैन ने बताया कि परिजनों द्वारा नाविकों पर पैसे मांगने के लगाए गए आरोपों को पुलिस ने डायरी में दर्ज कर लिया है और पूरे मामले की बारीकी से जांच की जा रही है, जिसके बाद दोषियों पर सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।

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