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    छात्रों के लिए अहम अपडेट, तीन भाषा नीति को लेकर नया निर्देश जारी

    नई दिल्ली। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए अपनी 'थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी' (त्रिभाषा नीति) के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। बोर्ड के इस फैसले के अनुसार, वर्तमान में 10वीं कक्षा में पढ़ रहे विद्यार्थियों को अब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा से छूट दे दी गई है। सीबीएसई के इस कदम से देश भर के लाखों छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को मानसिक तनाव से बड़ी राहत मिली है।

    मौजूदा छात्रों के लिए पुरानी व्यवस्था ही रहेगी प्रभावी

    बोर्ड द्वारा स्पष्ट किया गया है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान 10वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों पर यह नई नीति थोपी नहीं जाएगी। वे अपने पुराने पाठ्यक्रम के अनुसार ही पढ़ाई और परीक्षा देंगे। इसके अतिरिक्त, जो छात्र वर्तमान में 7वीं, 8वीं और 9वीं कक्षा में हैं, उन्हें भी भविष्य में 10वीं की बोर्ड परीक्षा के दौरान तीसरी भाषा का इम्तिहान नहीं देना होगा। भाषा चयन को लेकर बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं ले रखी हैं, वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं, लेकिन उन्हें एक अतिरिक्त भारतीय भाषा को शामिल करना अनिवार्य होगा।

    तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषाओं का होना अनिवार्य

    सीबीएसई के नए नियमों के तहत अब स्कूली स्तर पर तीन भाषाओं की पढ़ाई करनी होगी, जिसमें से कम से कम दो मूल भारतीय भाषाओं का होना अनिवार्य कर दिया गया है। छात्र तीसरी भाषा के तौर पर किसी विदेशी या गैर-भारतीय भाषा का चयन कर सकते हैं, बशर्ते उनकी बाकी दो भाषाएं भारतीय हों। यह नियम आगामी सत्र से कक्षा 9 के सभी विद्यार्थियों पर पूरी तरह लागू हो जाएगा, जहां वे अनिवार्य रूप से तीन भाषाएं पढ़ेंगे। तीसरी भाषा के विकल्प के रूप में छात्र अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, अरबी या स्पैनिश जैसी भाषाओं को चुन सकेंगे।

    भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना मुख्य उद्देश्य

    इस बड़े नीतिगत बदलाव के पीछे बोर्ड का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को एक से अधिक भारतीय भाषाओं में पारंगत बनाना है। सीबीएसई का मानना है कि भाषा सीखने की यह प्रक्रिया रटने के बजाय सार्थक, रोचक और ज्ञानवर्धक होनी चाहिए, जिससे छात्रों का सर्वांगीण विकास हो सके। माध्यमिक स्तर (कक्षा 9 और 10) में तीसरी भाषा को जोड़ना, दरअसल मिडिल स्तर (कक्षा 6 से 8) में शुरू की गई भाषाई शिक्षा का ही अगला चरण है। इसी विज़न को अमलीजामा पहनाने के लिए सत्र 2026-27 से इसे कड़ाई से लागू किया जा रहा है।

    कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए समझें भाषा चयन के विकल्प

    नए नियमों को आसान भाषा में समझाने के लिए बोर्ड ने तीन अलग-अलग परिस्थितियां सामने रखी हैं:

    • पहली स्थिति: यदि कोई छात्र पहले से दो भारतीय भाषाएं (जैसे हिंदी और तमिल) पढ़ रहा है, तो वह तीसरी भाषा के रूप में किसी अन्य भारतीय भाषा या अंग्रेजी-फ्रेंच जैसी विदेशी भाषा को चुन सकता है।

    • दूसरी स्थिति: यदि छात्र एक भारतीय और एक गैर-भारतीय भाषा (जैसे तमिल और अंग्रेजी) पढ़ रहा है, तो उसे तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य रूप से किसी भी भारतीय भाषा का चयन करना होगा।

    • तीसरी स्थिति: यदि कोई छात्र दो गैर-भारतीय भाषाएं (जैसे अंग्रेजी और फ्रेंच) पढ़ रहा है, तो आगामी सत्र के लिए उसे विशेष छूट मिलेगी। वह इन्हें पढ़ना जारी रख सकता है, लेकिन उसे तीसरी भाषा के तौर पर एक भारतीय भाषा को अपने पाठ्यक्रम में शामिल करना ही होगा।

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