More
    Homeराज्यमध्यप्रदेशमहाकाल मंदिर की डिजिटल पहल ‘त्रिनेत्र’ को मिला स्वर्ण पुरस्कार, 280 करोड़...

    महाकाल मंदिर की डिजिटल पहल ‘त्रिनेत्र’ को मिला स्वर्ण पुरस्कार, 280 करोड़ का राजस्व दर्ज

    उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर ने डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में देश भर में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित हुए 29वें नेशनल ई-गवर्नेंस सम्मेलन में महाकाल मंदिर के अत्याधुनिक 'त्रिनेत्र' प्रोजेक्ट को प्रतिष्ठित स्वर्ण पुरस्कार (गोल्ड मेडल) से नवाजा गया। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और राजस्थान के आईटी मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने उज्जैन के कलेक्टर रोशन सिंह को यह राष्ट्रीय सम्मान सौंपा।

    आधुनिक तकनीकों से लैस महाकाल की 'तीसरी आंख'

    यह प्रतिष्ठित अवार्ड महाकाल मंदिर परिसर और 'महाकाल रुद्रसागर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट एरिया' (MRIDA) में लागू किए गए एआई (AI) आधारित वीडियो सर्विलांस सिस्टम के लिए दिया गया है। मंदिर की सुरक्षा और व्यवस्था संभालने के लिए परिसर में 500 से ज्यादा एआई-सक्षम कैमरे दिन-रात काम कर रहे हैं। इन कैमरों में चेहरा पहचानने की तकनीक (फेसियल रिकॉग्निशन), संदिग्ध गतिविधियों को पकड़ने का सिस्टम, गाड़ियों के नंबर प्लेट पहचानने की ऑटोमैटिक व्यवस्था (ANPR) और रियल टाइम वीडियो एनालिटिक्स जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। इसी वजह से 'त्रिनेत्र' प्रोजेक्ट को महाकाल की 'तीसरी आंख' कहा जा रहा है।

    कड़े मूल्यांकन के बाद हुआ सर्वश्रेष्ठ परियोजना का चयन

    इस राष्ट्रीय पुरस्कार की रेस में त्रिनेत्र प्रोजेक्ट को कड़े तकनीकी मूल्यांकन से गुजरना पड़ा। अवार्ड फाइनल होने से पहले केंद्र सरकार की एक विशेष टीम ने खुद उज्जैन आकर पूरे सिस्टम की जमीनी हकीकत को परखा था। इसके बाद उज्जैन के कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने दिल्ली में देश की 13 सदस्यीय ज्यूरी के सामने इस पूरे प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन दिया। कड़े तकनीकी मापदंडों पर खरा उतरने के बाद ही इसे देश की सबसे बेहतरीन डिजिटल परियोजनाओं में चुनकर स्वर्ण पदक के लिए फाइनल किया गया।

    स्मार्ट सिस्टम से बदली महाकाल की पूरी व्यवस्था

    इस डिजिटल सिस्टम के लागू होने से महाकाल मंदिर की पूरी व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। श्रद्धालुओं की संख्या सालाना 1.5 करोड़ से बढ़कर अब 8 करोड़ के पार पहुंच चुकी है, फिर भी 'त्रिनेत्र' के सटीक पूर्वानुमान की वजह से त्योहारों पर 8 से 10 लाख की भीड़ को बिना किसी हादसे के (जीरो इंसिडेंट रिकॉर्ड) संभाल लिया जाता है। इस सिस्टम की मदद से भारी भीड़ में भी भक्तों को मात्र 15-20 मिनट में दर्शन हो रहे हैं। इसके अलावा, पिछले 45 दिनों में चेहरा पहचानने वाली तकनीक से 552 लापता लोगों को खोजकर महज 25-40 मिनट के भीतर उनके परिवारों से मिलाया गया। साथ ही, चोरी की घटनाओं पर लगाम लगी है और मंदिर को अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत न पड़ने से सालाना 8.6 करोड़ रुपये की बड़ी आर्थिक बचत भी हो रही है।

    सिंहस्थ 2028 के लिए बनाया जा रहा महाप्लान

    महाकाल मंदिर प्रबंधन की नजरें अब आगामी सिंहस्थ 2028 पर टिकी हैं। इस महाकुंभ के लिए वर्तमान 'त्रिनेत्र' सिस्टम को 8 गुना ज्यादा बड़ा और आधुनिक करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। सिंहस्थ के दौरान पूरे मेला क्षेत्र और शहर की सुरक्षा के लिए 140 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश से 3,500 नए स्मार्ट कैमरे लगाए जाएंगे। इसके साथ ही ड्रोन के जरिए आसमान से निगरानी, भीड़ की संख्या का पहले से अंदाजा लगाने वाली तकनीक और कई भाषाओं में घोषणा करने वाले आधुनिक सिस्टम को भी जोड़ा जाएगा, जिससे सिंहस्थ 2028 दुनिया का सबसे उन्नत और सुरक्षित धार्मिक आयोजन बन सके।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here