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    कैलास मानसरोवर यात्रा का पहला जत्था रवाना, 51 श्रद्धालुओं ने शुरू की पावन यात्रा

    विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी: मानसरोवर झील में स्नान की अनुमति नहीं, समूह से अलग न होने के निर्देश

    जयपुर। हिंदुओं, जैनों, बौद्धों और बोन परंपरा के अनुयायियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाने वाली पवित्र कैलास मानसरोवर यात्रा-2026 का पहला जत्था शनिवार सुबह नई दिल्ली से रवाना हो गया। विभिन्न राज्यों के 51 श्रद्धालुओं का पहला बैच सुबह 8:30 बजे यात्रा पर निकला। यात्रियों में 36 पुरुष और 15 महिलाएं शामिल हैं।

    विदेश मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस दल के सभी यात्री 30 जून को नई दिल्ली पहुंचे थे। यहां 3 जुलाई तक उनके पासपोर्ट, वीजा, मेडिकल जांच तथा अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पहला जत्था 4 जुलाई को टनकपुर, 5 जुलाई को धारचूला और इसके बाद यात्रा के अगले चरणों की ओर रवाना होगा।

    मानसरोवर झील में स्नान पर रहेगी रोक

    इस वर्ष यात्रा से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह है कि चीनी प्रशासन द्वारा वर्ष 2018 से लागू प्रतिबंध के चलते श्रद्धालुओं को पवित्र मानसरोवर झील में स्नान या डुबकी लगाने की अनुमति नहीं होगी विदेश मंत्रालय ने अपनी एडवाइजरी में सभी यात्रियों को इस नियम का सख्ती से पालन करने तथा पूरे यात्रा मार्ग में अपने निर्धारित समूह के साथ ही रहने के निर्देश दिए हैं।

    राजस्थान के 14 श्रद्धालु पहले जत्थे में शामिल

    अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने बताया कि पहले बैच में राजस्थान के 14 श्रद्धालु शामिल हैं, जिनमें जयपुर के 7 यात्री हैं।

    उन्होंने बताया कि दल में जयपुर के महारानी फार्म निवासी अनिल जैन गदिया (बयाना वाले) भी शामिल हैं। यात्रा पर रवाना होने से पहले गायत्री नगर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष अरुण शाह एवं पदाधिकारियों ने उनका तिलक, माला और साफा पहनाकर सम्मान किया तथा सफल यात्रा की शुभकामनाएं दीं।

    ऐसी रहेगी पूरी यात्रा व्यवस्था

    यात्रा के लिए दिल्ली से धारचूला तक श्रद्धालुओं को टेम्पो ट्रैवलर से ले जाया जाएगा। इसके बाद धारचूला से गुंजी और नाभीढांग तक लगभग 70 किलोमीटर का दुर्गम पहाड़ी मार्ग जीप से तय कराया जाएगा।

    यात्रा प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) ने यात्रियों के आवास, भोजन, परिवहन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित और सुगम तरीके से संपन्न हो सके।

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