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    मेयर बनाम पूर्व मेयर! ऋतु तावड़े और किशोरी पेडणेकर के विवाद ने पकड़ा तूल

    मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी के सियासी गलियारों में उस समय सरगर्मी बढ़ गई, जब मुंबई की वर्तमान महापौर ऋतु तावड़े ने पूर्व मेयर और मुंबई महानगरपालिका (BMC) में नेता प्रतिपक्ष किशोरी पेडणेकर पर बेहद गंभीर आरोप मढ़े। महापौर ऋतु तावड़े का दावा है कि पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर कुछ लोगों के साथ अनधिकृत रूप से उनके सरकारी दफ्तर में दाखिल हुईं और वहां रखे अत्यंत महत्वपूर्ण व गोपनीय शासकीय दस्तावेजों की वीडियो रिकॉर्डिंग करने के साथ-साथ उनकी तस्वीरें खींचने का प्रयास किया। इस कथित सुरक्षा चूक और मर्यादा उल्लंघन को लेकर वर्तमान महापौर ने आजाद मैदान पुलिस थाने में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया है।

    महापौर की अनुपस्थिति में कार्यालय में प्रवेश और बहस का आरोप

    मेयर ऋतु तावड़े ने घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार दोपहर लगभग 3:45 बजे वे जमीनी स्तर पर मानसून की तैयारियों और मैनहोल के निरीक्षण कार्यों की निगरानी के लिए दफ्तर से बाहर थीं। इसी दौरान उनकी गैर-मौजूदगी में विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर अपने सहयोगियों के साथ वहां पहुंचीं। तावड़े ने आरोप लगाया कि पेडणेकर ने वहां तैनात दफ्तर के कर्मचारियों के साथ अभद्र भाषा में बहस की, उन्हें डराने का प्रयास किया और पूरे कार्यालय परिसर की वीडियोग्राफी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही प्रतिपक्ष की नेता मुख्य केबिन में न जाने का दावा करें, परंतु प्रवेश द्वार से लगा पूरा परिसर महापौर कार्यालय का ही हिस्सा है जहां बेहद संवेदनशील सरकारी फाइलों पर काम होता है, और उनकी तस्वीरें लेना पूरी तरह गैर-कानूनी है।

    पूर्व मेयर ने आरोपों को बताया निराधार और बचकाना

    दूसरी तरफ, विपक्ष की नेता और पूर्व महापौर किशोरी पेडणेकर ने अपने ऊपर लगे इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह से निराधार और बचकाना करार दिया है। उन्होंने अपने बचाव में तर्क दिया कि वर्तमान महापौर से उनका कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है, बल्कि वे केवल अपने एक पुराने पत्र की स्थिति (स्टेटस) जानने के लिए वहां गई थीं। पेडणेकर के मुताबिक, उन्होंने मुंबई में मानसून के दौरान होने वाले हादसों और जलजमाव की स्थिति पर चर्चा के लिए बीएमसी की एक विशेष जनरल बॉडी मीटिंग (सदन की बैठक) बुलाने का आग्रह करते हुए मेयर को पत्र लिखा था, जिसका लंबे समय से कोई जवाब न मिलने के कारण उन्हें स्वयं दफ्तर जाना पड़ा।

    कानूनी कार्रवाई की चेतावनी और मानसून बैठकों पर विवाद

    किशोरी पेडणेकर ने पूर्व मेयर होने के नाते अपने अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि सामान्यतः किसी भी जनप्रतिनिधि के पत्र का उत्तर आठ दिनों के भीतर मिल जाना चाहिए, परंतु नागरिक प्रशासन के ढुलमुल रवैये के कारण वे सिर्फ जवाबदेही तय करने वहां पहुंची थीं। इस पलटवार पर कड़ा रुख अपनाते हुए मेयर ऋतु तावड़े ने कहा कि मानसून प्रबंधन और जलापूर्ति जैसे गंभीर विषयों पर बीएमसी सदन में पहले ही देर रात तक चली बैठक में विस्तृत चर्चा की जा चुकी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पत्र के बारे में जानकारी हासिल करना किसी भी नेता का अधिकार हो सकता है, लेकिन मेयर कार्यालय की आंतरिक व्यवस्था और गोपनीय फाइलों की तस्वीरें कैमरे में कैद करना नियमों का घोर उल्लंघन है, जिसके खिलाफ वे कानूनी कदम उठाने जा रही हैं।

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