रांची:झारखंड के बोकारो जिले में एक्सपायरी बियर बेचने के एक गंभीर मामले में सरकार ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। चास प्रखंड के कुर्रा थाना क्षेत्र स्थित एक अधिकृत शराब दुकान से भारी मात्रा में एक्सपायर्ड हो चुकी बियर बरामद होने के बाद, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद के कड़े निर्देशों पर प्रशासन ने एक बड़ी दंडात्मक कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस बड़ी लापरवाही के सामने आते ही झारखंड राज्य बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) के प्रबंध निदेशक ने त्वरित एक्शन लेते हुए विभाग के भीतर मौजूद जिम्मेदार कड़ियों पर गाज गिरा दी है, जिससे पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।
डिपो मैनेजर और क्लर्क सेवा से बर्खास्त
जांच रिपोर्ट सामने आने के तुरंत बाद जेएसबीसीएल के प्रबंध निदेशक (एमडी) नीरज कुमार सिंह ने कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। इस पूरे सिंडिकेट और लापरवाही के मुख्य जिम्मेदार माने जा रहे बोकारो जिले के डिपो मैनेजर अरविंद कुमार और वहां तैनात संबंधित क्लर्क को उनके पदों से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। इन दोनों ही कर्मियों पर डिपो से एक्सपायर्ड माल को बाजार में सप्लाई होने देने और स्टॉक का सही तरीके से मिलान न करने का सीधा आरोप है, जिसे विभाग ने सेवा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना है।
उच्चाधिकारियों और दुकानदार को कारण बताओ नोटिस
प्रबंध निदेशक ने केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर ही कार्रवाई नहीं की है, बल्कि क्षेत्र की निगरानी करने वाले उच्चाधिकारियों की जवाबदेही भी तय की है। उन्होंने बोकारो के सहायक आयुक्त उत्पाद संजय कुमार मेहता, दारोगा अमित कुमार गुप्ता और संबंधित शराब दुकान के संचालक के खिलाफ 'शो-काज' (कारण बताओ नोटिस) जारी करने के लिए उच्च स्तर पर मजबूत अनुशंसा भेजी है। इन सभी से तय समय के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है कि उनके रहते इतनी बड़ी संख्या में एक्सपायरी उत्पाद बाजार में कैसे बिक रहे थे।
जून के अंत में छापेमारी के दौरान खुला था राज
यह पूरा मामला पिछले महीने की 29 जून को उस समय उजागर हुआ था, जब गुप्त सूचना के आधार पर चास प्रखंड के कुर्रा थाना क्षेत्र की एक शराब दुकान में अचानक छापेमारी की गई थी। इस औचक निरीक्षण के दौरान टीम ने दुकान के भीतर से कुल 556 बोतल/कैन एक्सपायरी बियर बरामद की थी। तकनीकी जांच में यह बात सामने आई कि बरामद की गई यह बियर फरवरी 2026 में ही अपनी उपभोग की समय-सीमा (एक्सपायरी डेट) पार कर चुकी थी, जिसे कानूनन बेचा जाना आम जनता के स्वास्थ्य के साथ एक बड़ा खिलवाड़ था।
मंत्री के कड़े निर्देश और जांच टीम की रिपोर्ट
इस पूरे प्रकरण को उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने बेहद गंभीरता से लिया था और उन्होंने जेएसबीसीएल के प्रबंध निदेशक को साफ लहजे में तीन दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच कराने का अल्टीमेटम दिया था। मंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि इस पूरे नेक्सस में शामिल कोई भी दोषी अधिकारी या कर्मचारी बचना नहीं चाहिए। मंत्री के इस कड़े रुख के बाद एमडी ने महाप्रबंधक (जीएम) अभियान और प्रबंधक अभियान की एक संयुक्त विशेष टीम गठित कर मामले की जांच कराई, जिसमें विभागीय मिलीभगत और लापरवाही के सारे आरोप शत-प्रतिशत सही पाए गए, जिसके बाद यह बड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की गई।


