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    स्वास्थ्य योजनाओं में खराब प्रदर्शन पर जयपुर जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी एपीओ

    जयपुर। राजस्थान स्वास्थ्य विभाग ने शासकीय कार्यों में शिथिलता बरतने और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं के लचर क्रियान्वयन पर एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। विभाग ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी (RCHO), जयपुर प्रथम डॉ. आशा मीणा को उनके पद से हटाते हुए तत्काल प्रभाव से पदस्थापन की प्रतीक्षा (APO) में डाल दिया है। शासन की ओर से इस कड़े फैसले की आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।

    लापरवाही पर विभाग का सख्त रुख

    चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई इस कार्रवाई के पीछे लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक कमियां मुख्य वजह बताई जा रही हैं। विभागीय समीक्षा में यह बात सामने आई कि डॉ. आशा मीणा के कार्यकाल के दौरान मातृ एवं शिशु कल्याण से जुड़ी बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण योजनाओं की गति बेहद धीमी थी। जिले में स्वास्थ्य मानकों में सुधार न होने और उच्च अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद कार्यप्रणाली में बदलाव न आने के कारण आखिरकार मुख्यालय को यह दंडात्मक कदम उठाना पड़ा।

    स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में बड़ी कमियां

    जयपुर प्रथम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भवती महिलाओं के शुरुआती तीन महीनों के भीतर होने वाले आवश्यक पंजीकरण की संख्या काफी कम दर्ज की गई थी। इसके साथ ही बच्चों के शत-प्रतिशत टीकाकरण, गंभीर जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान व उनकी ट्रैकिंग, तथा मिजल्स-रुबेला (एमआर-2) लाइन लिस्ट जैसी अति-आवश्यक राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के धरातलीय क्रियान्वयन में जयपुर प्रथम पूरे राज्य में काफी पिछड़ गया था। समीक्षा बैठकों में इस प्रदर्शन को बेहद निराशाजनक और चिंताजनक माना गया।

    सजा के तौर पर दूरस्थ मुख्यालय तबादला

    विभागीय स्तर पर पाई गई इन सभी गंभीर अनियमितताओं और स्वास्थ्य सूचकांकों में गिरावट को देखते हुए शासन ने डॉ. आशा मीणा के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की। उन्हें न सिर्फ वर्तमान जिम्मेदारी से मुक्त किया गया है, बल्कि सजा के तौर पर जयपुर से सैकड़ों किलोमीटर दूर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय, श्रीगंगानगर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। आगामी आदेश तक उनका मुख्यालय श्रीगंगानगर ही नियत रहेगा।

    लक्ष्य प्राप्ति को लेकर सरकार की स्पष्ट चेतावनी

    इस पूरे घटनाक्रम पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ ने सरकार की नीति स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के सफल संचालन को सरकार अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखती है। उन्होंने सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है कि यदि भविष्य में भी किसी स्तर पर निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में कोताही या लापरवाही पाई गई, तो बिना किसी रियायत के सीधे अनुशासनात्मक और सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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