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    टैक्स, शिक्षा और सुधारों पर सरकार का फोकस, मानसून सत्र रहेगा अहम

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार 18वीं लोकसभा के आगामी आठवें सत्र में कई बड़े और दूरगामी नीतिगत बदलावों को अमलीजामा पहनाने की तैयारी कर चुकी है। इस सत्र के दौरान सरकार पांच नए अहम विधेयकों को संसद के पटल पर रख सकती है, जबकि पहले से लंबित पड़े दो विधेयकों को भी चर्चा और पारित कराने के लिए कार्यसूची में शामिल किया गया है। इन कानूनी प्रस्तावों का सीधा संबंध देश की कर प्रणाली, न्यायपालिका, नागरिक पंजीकरण, राष्ट्रीय गौरव और लघु उद्योगों (MSMEs) के विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से है।

    अध्यादेशों की जगह लेंगे ये दो नए बड़े विधेयक

    संसद के इस सत्र में सरकार दो अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने जा रही है, जो पूर्व में जारी किए गए अध्यादेशों का स्थान लेंगे। इसमें सबसे पहला इनकम-टैक्स (संशोधन) विधेयक, 2026 है, जिसके माध्यम से देश की कर प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने और कर संबंधी कुछ अहम प्रावधानों में जरूरी सुधार करने की तैयारी है। वहीं दूसरा सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 है, जिसका उद्देश्य देश की सर्वोच्च अदालत में लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए जजों की संख्या बढ़ाने संबंधी अध्यादेश को स्थाई रूप से कानूनी जामा पहनाना है।

    नागरिक डेटा और राष्ट्रीय सम्मान को लेकर होंगे कड़े प्रावधान

    आम जनता और राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़े कानूनों को समय के अनुकूल बनाने के लिए सरकार दो विशेष संशोधन विधेयक ला रही है। इसके तहत जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 लाया जा रहा है, जो देश के नागरिक पंजीकरण डेटा को पूरी तरह डिजिटल, आधुनिक और पारदर्शी बनाएगा और इससे रिकॉर्ड्स का रखरखाव बेहद सुरक्षित हो जाएगा। इसके साथ ही राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए देश के राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति आदर भाव सुनिश्चित करने के लिए पुराने कानूनों को पहले से ज्यादा सख्त और प्रभावी बनाया जाएगा।

    MSME क्षेत्र के सशक्तिकरण पर भी रहेगा विशेष ध्यान

    देश की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने वाली है। इस प्रस्तावित कानून के लागू होने से लघु उद्योगों के लिए वित्तीय मदद पाने के रास्ते आसान होंगे। इसके अलावा यह बिल छोटे कारोबारियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की ताकत देगा और देश में व्यापार करने की सुगमता यानी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

    इन दो पुराने लंबित विधेयकों पर भी रहेगी संसद की नजर

    नए कानूनों के प्रस्तावों के साथ-साथ पहले से संसद में लंबित चल रहे दो अन्य विधेयकों पर भी इस सत्र में चर्चा आगे बढ़ सकती है। इनमें विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 शामिल है, जिसे इसी साल 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था और इसका मुख्य उद्देश्य देश में आने वाली विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को कड़ा बनाना है। वहीं दूसरा विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 है, जिसे पिछले साल 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किए जाने के बाद संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास जांच के लिए भेजा गया था, जिस पर अब समिति की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

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