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    भारत-पनामा संबंधों को मिलेगी नई रफ्तार, 19 जुलाई को भारत आएंगे विदेश मंत्री जेवियर

    नई दिल्ली। भारत और पनामा के बीच रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को एक नई दिशा देने के उद्देश्य से पनामा के विदेश मंत्री जेवियर एडुआर्डो मार्टिनेज-आचा वास्केज भारत की आधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं। 19 से 23 जुलाई तक चलने वाला यह दौरा व्यापारिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी साझेदारी के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, पनामा के विदेश मंत्री अपनी यात्रा के दौरान भारत के शीर्ष नेतृत्व के साथ विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

    दिल्ली में उच्च स्तरीय कूटनीतिक बैठकों का दौर

    पनामा के विदेश मंत्री सोमवार को भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ नई संसद भवन में मुलाकात करेंगे, जहां दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाने पर जोर दिया जाएगा। इसके उपरांत, वे हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें वैश्विक चुनौतियों और आपसी सहयोग के कई अहम समझौतों पर चर्चा होगी। यह बैठक दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों को और अधिक मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगी।

    समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार पर केंद्रित वार्ता

    अपनी यात्रा के दौरान बुधवार को पनामा के विदेश मंत्री परिवहन भवन का दौरा करेंगे, जहां उनकी मुलाकात बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल से होगी। पनामा नहर की वैश्विक व्यापार में रणनीतिक भूमिका को देखते हुए भारत के लिए यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण है। इस चर्चा का मुख्य केंद्र समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक आवागमन को सुगम बनाने के साथ ही दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी को बढ़ाना होगा।

    आतंकवाद के विरुद्ध साझा प्रतिबद्धता

    पनामा इस समय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का निर्वाचित सदस्य है और आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का एक मजबूत समर्थक बनकर उभरा है। पूर्व में पनामा के नेतृत्व ने आतंकवाद के प्रति भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का स्पष्ट समर्थन किया है। पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो क्विंटेरो ने भी भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात के दौरान आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में अपना पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगी।

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