भोपाल: मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। सूबे के शिवपुरी जिले में स्थित प्रसिद्ध नरवर किले से एक अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक तोप के गायब होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसकी जांच में पुलिस और पुरातत्व विभाग की टीमें तेजी से जुट गई हैं। 16वीं शताब्दी की यह बेशकीमती तोप क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का एक अहम हिस्सा थी। इस चोरी को राज्य के विभिन्न हिस्सों से पिछले दो दशकों के दौरान गायब हुई अमूल्य प्राचीन कलाकृतियों और ऐतिहासिक वस्तुओं की कड़ी में एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।
भारी-भरकम वजन के कारण बड़ी साजिश की आशंका
किले से गायब हुई इस ऐतिहासिक तोप का कुल वजन लगभग 3000 किलोग्राम (3 टन) आंका गया है। इतने विशालकाय और भारी-भरकम वेपन को सुरक्षित स्थान से हटाना किसी आम चोर या छोटे गिरोह के बस की बात नहीं है। पुलिस अधिकारियों का प्रारंभिक तौर पर मानना है कि बिना किसी बड़े मालवाहक वाहन या आधुनिक मशीनरी के इस तोप को हिला पाना भी पूरी तरह नामुमकिन था। इस तथ्य से साफ संकेत मिलते हैं कि इस पूरी वारदात को अंजाम देने के लिए अपराधियों ने एक सोची-समझी योजना के तहत क्रेन और बड़े ट्रकों का इस्तेमाल किया है।
ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा पर खड़े हुए सवाल
नरवर किले जैसी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक साइट से इतनी बड़ी तोप का चोरी हो जाना सुरक्षा व्यवस्था में एक बहुत बड़ी चूक को उजागर करता है। स्थानीय नागरिकों और इतिहास प्रेमियों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है, क्योंकि यह किला पर्यटन और इतिहास के दृष्टिकोण से बेहद खास माना जाता है। इस घटना ने एक बार फिर राज्य के सुदूर इलाकों में स्थित प्राचीन किलों, स्मारकों और वहां मौजूद पुरावशेषों की सुरक्षा व्यवस्था को रामभरोसे छोड़े जाने के दावों को हवा दे दी है।
अपराधियों की धरपकड़ के लिए पुलिस की घेराबंदी
चोरी की इस बड़ी वारदात के सामने आते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया है। पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश के लिए विशेष टीमों का गठन कर दिया है। किले के आसपास के रास्तों और हाईवे पर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि घटना के समय वहां से गुजरे संदिग्ध क्रेन और भारी वाहनों की पहचान की जा सके। इसके साथ ही, पुलिस आसपास के क्रेन ऑपरेटरों और संदिग्ध वाहन मालिकों से भी गहन पूछताछ कर रही है।
प्राचीन कलाकृतियों के तस्करों पर गहराया शक
जांच एजेंसियां इस मामले को अंतरराष्ट्रीय या अंतरराज्यीय प्राचीन वस्तु तस्कर गिरोहों से जोड़कर भी देख रही हैं। पिछले कुछ सालों में देश के विभिन्न हिस्सों से ऐतिहासिक धरोहरों को चुराकर ऊंचे दामों पर बेचने वाले कई नेटवर्क सक्रिय रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इस चोरी के पीछे भी किसी बड़े सिंडिकेट का हाथ है, जो इन ऐतिहासिक हथियारों को अवैध बाजार में खपाने की फिराक में है। प्रशासन ने दावा किया है कि बहुत जल्द इस मामले का पर्दाफाश कर तोप को बरामद कर लिया जाएगा।


