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    Homeदेशआयरन फैक्ट्री में जोरदार धमाका, पांच श्रमिक घायल, राहत-बचाव अभियान जारी

    आयरन फैक्ट्री में जोरदार धमाका, पांच श्रमिक घायल, राहत-बचाव अभियान जारी

    जामुड़िया। पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्दवान जिले के जामुड़िया में एक स्पंज आयरन फैक्ट्री की भट्टी में हुए भीषण विस्फोट से क्षेत्र दहल उठा। शुक्रवार देर रात हुए इस धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसकी गूंज एक किलोमीटर दूर तक सुनाई दी, जिसके बाद फैक्ट्री में विकराल आग लग गई। राहत और बचाव कार्य के लिए दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर जुटी हैं, लेकिन भट्टी के आसपास अत्यधिक तापमान होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी बाधा आ रही है।

    घायलों की स्थिति गंभीर और तलाशी अभियान

    प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, हादसे में कम से कम पांच मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिन्हें तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। फिलहाल, सुरक्षा मानकों के चलते फैक्ट्री के अंदर गहन तलाशी अभियान तब तक शुरू नहीं हो सकता जब तक तापमान सामान्य न हो जाए। स्थानीय निवासियों का दावा है कि आठ से दस मजदूर अभी भी फैक्ट्री के भीतर लापता हो सकते हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। विस्फोट के झटकों से आसपास के कई घरों में भी दरारें आ गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश है।

    प्रबंधन की लापरवाही पर उठे सवाल

    इस भीषण हादसे के बाद फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद से प्रबंधन का कोई भी जिम्मेदार प्रतिनिधि मौके पर मौजूद नहीं था। घायलों को समय रहते अस्पताल पहुंचाने का जिम्मा स्थानीय नेताओं और प्रशासन को उठाना पड़ा। फैक्ट्री में कार्यरत मजदूरों ने काम के दौरान असुरक्षित परिस्थितियों का आरोप लगाया है, जिसके बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    उच्चस्तरीय जांच की मांग

    इस दुखद घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। घटना की गंभीरता को देखते हुए राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। सरकार से मांग की गई है कि इस प्रकार की औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य हो ताकि भविष्य में ऐसे जानलेवा हादसों को टाला जा सके। फैक्ट्री प्रबंधन की भूमिका की जांच करने और दोषी पाए जाने पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने का दबाव प्रशासन पर लगातार बढ़ रहा है।

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