कथित फर्जी पट्टों के मामले में दर्ज हुई प्राथमिकी, प्रेस वार्ता में अलग-अलग बयानों से बढ़ा विवाद
अलवर। ग्राम पंचायत देशूला एक बार फिर कथित फर्जी पट्टों और गोचर भूमि पर पट्टे जारी किए जाने के मामले को लेकर चर्चा में है। एक ओर ग्राम पंचायत की ओर से उद्योगनगर (एमआईए) थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है, वहीं दूसरी ओर प्रेस वार्ता के दौरान सरपंच, उनकी बहू और शिकायतकर्ताओं के अलग-अलग बयानों ने पूरे मामले को नए विवाद में ला खड़ा किया है।
शिकायतकर्ता बलदेव ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय में की थी, जिसके बाद पूरे प्रकरण की जांच शुरू हुई। उनका कहना है कि कथित फर्जी पट्टों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्राम पंचायत की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार जिला परिषद और पंचायत समिति की जांच में गोचर भूमि से जुड़े कई पट्टों में अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच प्रतिवेदन के आधार पर उद्योगनगर (एमआईए) थाने में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया गया है। पंचायत का कहना है कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर ही कानूनी कार्रवाई की गई है।
प्रेस वार्ता के दौरान सरपंच सावित्री देवी ने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि कथित फर्जी पट्टे किस प्रकार बनाए गए। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।
वहीं शिकायतकर्ता दीपक ने सरपंच, उपसरपंच और पंचायत के कुछ अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि कथित फर्जी पट्टों का पूरा मामला मिलीभगत का परिणाम है और निष्पक्ष जांच होने पर पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी।
दीपक ने यह भी आरोप लगाया कि सरपंच की बहू ने कथित रूप से एक पट्टा बनवाने के लिए दूसरे पक्ष को 70 हजार रुपये दिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पंचायत का पक्ष सही था तो इतनी बड़ी राशि देने की आवश्यकता क्यों पड़ी। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
प्रेस वार्ता के दौरान सबसे अधिक चर्चा अलग-अलग पक्षों के विरोधाभासी बयानों को लेकर रही। सरपंच ने स्वयं को मामले की जानकारी से अनभिज्ञ बताया, जबकि उनके साथ मौजूद उनकी बहू का पक्ष अलग रहा। दूसरी ओर शिकायतकर्ता दीपक के आरोप पूरी तरह भिन्न कहानी प्रस्तुत करते दिखाई दिए।
दीपक का आरोप है कि प्रेस वार्ता में मौजूद लोग भी एकमत नहीं थे। किसी ने एक बात कही तो किसी ने दूसरी, जिससे पूरे मामले को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई। उनका कहना है कि जनता के सामने पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट रूप से रखने के बजाय अलग-अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया।
देशूला ग्राम पंचायत में कथित फर्जी पट्टों और गोचर भूमि से जुड़े आरोपों को लेकर अब प्रशासनिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हैं। एक ओर प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है तो दूसरी ओर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई अब पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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