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    छात्र प्रदर्शन पर प्रियंका गांधी का हमला, लाठीचार्ज और आंसू गैस को लेकर सरकार से पूछे सवाल

    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और शशि थरूर ने सोमवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। दोनों नेताओं ने सरकार पर संसद में जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया है। प्रियंका गांधी ने जहां शिक्षा नीति की विफलता और छात्रों पर बल प्रयोग की निंदा की, वहीं शशि थरूर ने अयोध्या मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं और नीट परीक्षा पेपर लीक जैसे ज्वलंत विषयों को सदन में उठाने की मांग की।

    छात्रों के दमन और शिक्षा नीति पर सवाल

    प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हम लगातार चर्चा की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने शिक्षा प्रणाली में व्याप्त समस्याओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि जब छात्र अपने भविष्य के लिए आवाज उठा रहे हैं, तो सरकार उन पर आंसू गैस छोड़ रही है और लाठीचार्ज कर रही है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आखिर वे अपने ही देश के बच्चों के साथ इस तरह का हिंसक व्यवहार क्यों कर रहे हैं।

    विरोध प्रदर्शन और लाठीचार्ज का तर्क

    संसद मार्ग पर प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज पर शशि थरूर ने गहरा रोष प्रकट किया। उन्होंने कहा कि एक अहिंसक विरोध प्रदर्शन पर सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग करना पूरी तरह से हिंसात्मक कृत्य है, जिसका कोई तर्क समझ से परे है। थरूर ने सवाल किया कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने वालों को लाठियों से क्यों कुचला जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद वह जगह है जहाँ जनता की समस्याओं को रखा जाना चाहिए, न कि केवल सरकारी एजेंडे को रबर स्टैंप की तरह पारित किया जाना चाहिए।

    संसदीय लोकतंत्र में संवाद की अनिवार्यता

    शशि थरूर ने संसद में गतिरोध पर जोर देते हुए कहा कि सरकार को विपक्ष की आवाज सुनने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष तभी सहयोग कर सकता है जब सरकार भी चर्चा के लिए गुंजाइश रखे, क्योंकि लोकतंत्र में कामकाज आपसी सहमति और लेनदेन से चलता है। थरूर ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि संसद का मंच जनता के मुद्दों को उठाने के लिए नहीं है, तो फिर इसकी सार्थकता क्या है। उन्होंने मांग की कि सरकार नीट और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर बहस की अनुमति दे ताकि देश को सच्चाई का पता चल सके।

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