नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के जिला एवं अधीनस्थ न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने संबंधी अपने अंतरिम आदेश में संशोधन करते हुए स्थिति स्पष्ट कर दी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि राज्य के न्यायिक अधिकारी फिलहाल 60 वर्ष की मौजूदा तय आयु पर ही सेवानिवृत्त होंगे। सर्वोच्च अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि 60 वर्ष के बाद सेवा विस्तार का लाभ केवल उन्हीं राज्यों में लागू होगा, जहाँ संबंधित राज्य सरकार और हाईकोर्ट दोनों इसके लिए अपनी स्पष्ट सिफारिश करेंगे। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व में जारी अंतरिम आदेश में यह महत्वपूर्ण बदलाव किया है।
राजस्थान सरकार ने रखा अपना स्पष्ट रुख
मामले की सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए अदालत को अवगत कराया गया कि राज्य में सरकारी कर्मचारियों और जिला स्तरीय न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष निर्धारित है। राज्य सरकार की ओर से इसे बढ़ाने संबंधी कोई सिफारिश प्रस्तुत नहीं की गई है। इसके साथ ही सर्वोच्च अदालत ने यह भी अपने रिकॉर्ड पर लिया कि देश के कई अन्य राज्यों ने भी न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा बढ़ाए जाने का विरोध किया है।
सहमति वाले राज्यों में ही मिलेगा सेवा विस्तार का लाभ
शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि जहाँ राज्य सरकार और संबंधित उच्च न्यायालय दोनों की ओर से परस्पर सहमति होगी, केवल वहीं के न्यायिक अधिकारियों को 60 वर्ष की आयु के बाद भी पद पर बने रहने का लाभ मिल सकेगा। जिन राज्यों में ऐसी कोई आधिकारिक सिफारिश या सहमति मौजूद नहीं है, वहाँ अधिकारी अपनी निर्धारित 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर ही नियमनुसार सेवानिवृत्त माने जाएंगे।
मध्य प्रदेश और तेलंगाना के संदर्भ पर विचार
पीठ ने सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश और तेलंगाना से जुड़े मामलों पर भी विचार-विमर्श किया। अदालत ने उल्लेख किया कि इन राज्यों में सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का विषय भिन्न परिस्थितियों में सामने आया था, क्योंकि वहाँ की राज्य सरकारों द्वारा इसकी सिफारिश की गई थी। विशेष रूप से मध्य प्रदेश के मामले को अलग तथ्यात्मक स्थितियों पर आधारित मानते हुए उस पर चर्चा की गई।
सभी राज्यों और उच्च न्यायालयों से मांगा गया हलफनामा
सुप्रीम कोर्ट ने देश की सभी राज्य सरकारों और उच्च न्यायालयों को निर्देश जारी किए हैं कि वे न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 61 वर्ष करने के संबंध में अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए हलफनामा दाखिल करें। अदालत इस विषय पर देश भर के लिए एक समान नीति अपनाने पर विचार कर रही है और मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को तय की गई है, जहाँ सभी पक्षों के जवाबों का समीक्षात्मक विश्लेषण किया जाएगा।


