इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के नगर निगम (बिल्डिंग परमिशन शाखा) में बीते एक साल के भीतर मंजूर किए गए भवनों के नक्शों की नए सिरे से पड़ताल शुरू हो गई है। इसके तहत शहर के सभी 22 जोनों से अलग-अलग कॉलोनियों और मोहल्लों की 50 से अधिक फाइलों को रैंडम तरीके से निकाला गया है। इस जांच के दायरे में छोटे-बड़े हर श्रेणी के नक्शे शामिल किए गए हैं और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी है।
निगम अफसरों की अवहेलना और अधिकारियों की फटकार
दरअसल, बिल्डिंग परमिशन शाखा के अपर आयुक्त प्रखर सिंह ने 8 जुलाई को ही सभी 22 जोनों में तैनात बिल्डिंग अफसरों (बीओ) को एक-दूसरे के जोन के नक्शों की जांच करने का जिम्मा सौंपा था। निष्पक्षता के लिए एक बीओ को दूसरे बीओ के क्षेत्र की जांच का काम दिया गया था। हालांकि, गड़बड़ियां उजागर होने के डर से बीओ ने आपस में साठगांठ कर जांच शुरू ही नहीं की। मामला संज्ञान में आते ही अपर आयुक्त ने कड़ी फटकार लगाई और मुख्यालय के बीओ सत्येंद्र सिंह राजपूत को इस जांच की कमान सौंपी, जिसके बाद तेजी से फाइलों को निकालकर जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
इन मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित है नक्शों की जांच
मुख्यालय बीओ सत्येंद्र सिंह राजपूत के अनुसार निष्पक्ष जांच के लिए पूरे इंदौर शहर से फाइलों का चयन किया गया है। जांच टीम मुख्य रूप से इस बात की पड़ताल कर रही है कि नक्शा पास करते समय निर्धारित शुल्क सही जमा कराया गया था या इसमें कोई रियायत दी गई। इसके अलावा, बहुमंजिला इमारतों में पार्किंग के तय नियमों का ईमानदारी से पालन हुआ है या नहीं और क्या नियमों को ताक पर रखकर गलत तरीके से स्वीकृति तो नहीं दी गई—इन सभी अहम पहलुओं पर सूक्ष्मता से समीक्षा की जा रही है।
इसी हफ्ते आ सकती है अंतिम जांच रिपोर्ट
निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, जांच प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसी सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। यदि रिपोर्ट में किसी बीओ द्वारा नक्शा पास करने में नियमों की अनदेखी या वित्तीय गड़बड़ी पाई जाती है, तो उनके खिलाफ विभागीय दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। तब तक के लिए निगम के सभी 22 जोनों के बिल्डिंग अफसरों में हड़कंप का माहौल बना हुआ है।


