More
    Homeराजनीतिराहुल गांधी के धरने ने बढ़ाया दबाव, सरकार ने अचानक खोला वांगचुक...

    राहुल गांधी के धरने ने बढ़ाया दबाव, सरकार ने अचानक खोला वांगचुक से संवाद

    नई दिल्ली: नीट परीक्षा में धांधली और पर्चा लीक को लेकर जारी घमासान के बीच केंद्र सरकार के शुरुआती कदम पूरी तरह बेअसर साबित हुए हैं। स्थिति हाथ से निकलते देख सरकार को अपनी पुरानी रणनीति छोड़कर अचानक नए सिरे से कदम उठाने पड़े हैं। खासकर मंगलवार को जब संसद भवन के निकट विपक्षी नेताओं की सियासी हलचल तेज हुई और प्रधानमंत्री आवास के आसपास विरोध की तपिश पहुंची, तो सत्ता पक्ष बैकफुट पर आ गया। इसका असर यह हुआ कि महीनों से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से केंद्रीय मंत्रियों को मुलाकात करनी पड़ी और अस्पताल जाकर घायल अभ्यर्थियों का हाल-चाल भी पूछना पड़ा। यही नहीं, बुधवार को सरकार ने विपक्ष की संसद में विशेष चर्चा कराने की मांग भी स्वीकार कर ली, हालांकि विपक्ष अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ गया है।

    सत्ता पक्ष का बदलता रुख और सियासी हलचल

    शुरुआती दौर में जब जंतर-मंतर पर अभ्यर्थियों का जमावड़ा कम था, तब जिम्मेदार अधिकारियों और रणनीतिकारों ने इसे हल्के में लिया। उनका मानना था कि यह प्रदर्शन ज्यादा दिन नहीं चलेगा। लेकिन सोमवार के संसद मार्च के बाद जैसे ही प्रमुख विपक्षी नेताओं का सीधा समर्थन इस आंदोलन को मिला, माहौल पूरी तरह बदल गया। राजनीतिक दबाव बढ़ते ही सरकार को यह अहसास हो गया कि मामले की अनदेखी अब भारी पड़ सकती है।

    अनशन स्थल और अस्पतालों में मंत्रियों की दौड़

    आंदोलनकारियों के प्रति सरकार के रवैये में आया बदलाव बेहद चौंकाने वाला है। कुछ ही दिनों पहले तक अभ्यर्थियों के प्रतिनिधियों को केंद्रीय मंत्रियों से मिलने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था और औपचारिक बातचीत के बाद टाल दिया जाता था। लेकिन विरोध प्रदर्शन के उग्र होते ही परिदृश्य रातों-रात बदल गया। भूख हड़ताल के चौबीसवें दिन केंद्रीय मंत्रियों का दल खुद वांगचुक से मिलने पहुंचा और उनसे अनशन खत्म करने का आग्रह किया।

    विपक्ष का प्रभाव और सरकार की मजबूरी

    सरकार के इस तरह अचानक सक्रिय होने के पीछे मुख्य वजह इस मुद्दे का पूरी तरह सियासी रूप ले लेना है। रणनीतिकारों को डर था कि बिना किसी बड़े चेहरे के चल रहा यह युवा आंदोलन अब एक बड़ा राजनीतिक मंच बन चुका है। इसी दबाव के चलते संसद में इस विषय पर किसी भी दिन बहस कराने की सहमति दी गई। हालांकि, देश भर में लगातार हो रही पर्चा लीक की घटनाओं से युवाओं में पनपा असंतोष अब भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here