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    Homeराज्यबिहारपटना हिंसा की जांच तेज, पत्थरबाजी के पीछे किसका था मास्टरमाइंड?

    पटना हिंसा की जांच तेज, पत्थरबाजी के पीछे किसका था मास्टरमाइंड?

    पटना। राजधानी दिल्ली में भड़की विरोध की चिंगारी ने 22 जुलाई को बिहार की राजधानी पटना को भी अपनी चपेट में ले लिया। वामपंथी छात्र संगठन आइसा के बैनर तले गांधी मैदान के गेट नंबर दस से शुरू हुआ यह प्रदर्शन देखते ही देखते उग्र हो गया। शुरुआती दौर में करीब दो सौ की संख्या में निकले युवा जेपी गोलंबर पहुंचते-पहुंचते पांच सौ से अधिक हो गए। जब पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की, तो उपद्रवियों ने अचानक पथराव शुरू कर दिया, जिसमें कई पत्रकार और पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसके बाद करीब दस हजार प्रदर्शनकारी पुलिस को छकाते हुए डाकबंगला चौराहे पर जमा हो गए और भीषण उपद्रव मचाया।

    उग्र भीड़ ने तोड़ी बैरिकेडिंग और भाजपा दफ्तर समेत मंत्री आवास पर किया हमला

    डाकबंगला चौराहे पर भीड़ बेकाबू हो गई और पुलिसकर्मियों पर अंधाधुंध पथराव करने लगी, जिससे कई जवानों के सिर फट गए। उपद्रवी बैरिकेडिंग तोड़ते हुए आयकर गोलंबर के रास्ते सीधे भाजपा प्रदेश कार्यालय जा पहुंचे और वहां तोड़फोड़ की। हद तो तब हो गई जब उपद्रवियों का एक गुट राजभवन की ओर बढ़ते हुए केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव के सरकारी आवास में घुस गया। वहां मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई और परिसर में खड़ी गाड़ियों के शीशे चकनाचूर कर दिए गए। स्थिति बिगड़ते देख बीएसएफ, सीआईएसएफ और पुलिस बल ने आंसू गैस के गोले छोड़े तथा कड़ी मशक्कत के बाद शाम तक हालात पर काबू पाया।

    साजिश के तहत माहौल बिगाड़ने का आरोप और धार्मिक नारों पर उठे सवाल

    घटना के बाद केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव ने मीडिया से बातचीत में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कोई सामान्य छात्र आंदोलन नहीं था। उपद्रवियों में अधेड़ उम्र के लोग भी शामिल थे, जिससे साफ जाहिर होता है कि यह एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि बाहर से आए लोगों द्वारा उकसावे वाले और धार्मिक नारे भी लगाए जा रहे थे। मंत्री ने मांग की है कि इस पूरे षड्यंत्र की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि भविष्य में बिहार की शांति व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले असामाजिक तत्वों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।

    500 अज्ञात उपद्रवियों पर केस दर्ज, बाहरी पत्थरों के इस्तेमाल से गहराया शक

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना पुलिस प्रशासन ने 500 अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है और लगभग 50 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि पथराव में इस्तेमाल किए गए पत्थर स्थानीय क्षेत्र के नहीं हैं, बल्कि उन्हें विशेष रूप से बाहर से मंगवाया गया था। इसके साथ ही 21 जुलाई की रात दिल्ली से निर्देश मिलने और हिंसा के लिए फंडिंग किए जाने के इनपुट भी मिले हैं, जिसकी गहनता से छानबीन की जा रही है।

    सोशल मीडिया की निगरानी तेज और शहर में केंद्रीय बलों की तैनाती

    सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए पूरे बिहार में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और पटना के संवेदनशील इलाकों में पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है। पुलिस उपद्रव के दौरान मिले वीडियो फुटेज की मदद से हिंसा में शामिल चेहरों की पहचान करने में जुटी है। इसके अलावा हिंसा को भड़काने के लिए सोशल मीडिया पर चलाए गए अभियानों की भी तकनीकी जांच की जा रही है ताकि पर्दे के पीछे छिपे मुख्य साजिशकर्ताओं को बेनकाब किया जा सके।

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