मुरैना:मुरैना नगर पालिक निगम में भ्रष्टाचार और विकास कार्यों में अनियमितताओं की शिकायतें करना अब महज एक प्रशासनिक औपचारिकता बनकर रह गया है। पिछले कई महीनों से शहर में जारी निर्माण कार्यों, सीवरेज लाइन, चंबल वाटर प्रोजेक्ट, प्रधानमंत्री आवास योजना, कायाकल्प योजना और साफ-सफाई व्यवस्था में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ियों की शिकायतें की गईं, लेकिन निगम प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। जनहित के मुद्दों पर लगातार अनदेखी से शहरवासियों में गहरा आक्रोश पनप रहा है।
ज्ञापन और शिकायतों पर जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति करने का आरोप
पूर्व पार्षद दिलीप सिंह राठौर द्वारा शहर की बदहाल स्थिति को लेकर लगातार आवाज उठाई जा रही है। उन्होंने 'भूत-प्रेत पकड़ो सड़क बचाओ' अभियान के समापन के अवसर पर अनुविभागीय अधिकारी (SDM) मुरैना को मुख्यमंत्री के नाम छह प्रमुख बिंदुओं पर विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा था। हालांकि, ज्ञापन सौंपने के 47 दिनों बाद जारी किए गए प्रशासनिक पत्र में केवल औपचारिक खानापूर्ति देखने को मिली। नगर निगम आयुक्त द्वारा गठित जांच समिति ने अब तक धरातल पर कोई ठोस जांच नहीं की है, न ही मौके का निरीक्षण किया गया है, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने की ओर इशारा करता है।
करोड़ों के विकास कार्यों में भारी अनियमितताएं और बुनियादी ढांचा पूरी तरह ध्वस्त
शहर में विकास के नाम पर सरकारी बजट की जमकर बर्बादी की जा रही है और गुणवत्ता के साथ खुला खिलवाड़ हो रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़कें महज छह महीनों के भीतर उखड़ गईं, लेकिन इसके बावजूद ठेकेदारों को पूरा भुगतान कर दिया गया और जनता को गड्ढे ही मिले। वहीं दूसरी ओर सीवरेज प्रोजेक्ट 1.0 को कागजों पर पूर्ण घोषित कर दिया गया है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि रोजाना सीवर जाम हो रहे हैं और गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। वार्ड क्रमांक 1 से 47 तक सड़कें, नालियां और पाइपलाइनें तोड़कर लावारिस छोड़ दी गई हैं तथा मरम्मत के नाम पर केवल लीपापोती की जा रही है।
जिम्मेदार अधिकारियों की शह पर दोषियों को बचाने और जनता को गुमराह करने की कोशिश
नगर निगम मुरैना के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी भ्रष्टाचार पर पर्दा डालकर दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासनिक लापरवाही सीधे तौर पर भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद कर रही है। जब शिकायतकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों को ही गुमराह किया जाएगा, तो व्यवस्था में पारदर्शिता की उम्मीद कैसे की जा सकती है। शहर की जनता का आरोप है कि शिकायतों की फाइलें बिना किसी नतीजे के बंद की जा रही हैं और कोई भी अधिकारी जवाबदेही लेने को तैयार नहीं है।
कलेक्टर से मुलाकात की तैयारी और मांग पूरी न होने पर बड़े जनआंदोलन की चेतावनी
नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार और शिकायतों पर कार्रवाई न होने के विरोध में प्रतिनिधिमंडल जिला कलेक्टर से मुलाकात कर स्वतंत्र जांच की मांग रखेगा। पूर्व पार्षद दिलीप सिंह राठौर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो इस मामले को लोकायुक्त, नगरीय प्रशासन विभाग भोपाल और राज्य सूचना आयोग तक ले जाया जाएगा। इसके साथ ही 'चश्मा आंदोलन', 'दाल-आटा-चावल आंदोलन' और 'भूत-प्रेत पकड़ो सड़क बचाओ' जैसे अभियानों के जरिए पूरे शहर में उग्र जनजागरण आंदोलन चलाया जाएगा।


