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    Homeदुनियादुनिया के व्यापारिक रास्तों पर संकट! बाब-अल-मंदेब की नाकेबंदी का डर

    दुनिया के व्यापारिक रास्तों पर संकट! बाब-अल-मंदेब की नाकेबंदी का डर

    तेहरान/सना: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण पहले से ही वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया हुआ है। इस बीच, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब से बदला लेने के उद्देश्य से लाल सागर के रणनीतिक मार्ग 'बाब-अल-मंदेब' (Bab-el-Mandeb) जलडमरूमध्य की नाकेबंदी करने का ऐलान कर दिया है। हूतियों ने यह कदम सना हवाई अड्डे पर सऊदी अरब के हमलों और वर्षों से जारी नाकेबंदी के जवाब में उठाने का दावा किया है। यदि यह नाकेबंदी लागू होती है, तो दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल आने की आशंका है।

    वैश्विक ऊर्जा व्यापार का 30% हिस्सा खतरे में

    बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और यह होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद दुनिया का सबसे अहम तेल परिवहन मार्ग है।

    • होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक तेल आपूर्ति के करीब 20 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित करता है, जहाँ पहले से ही आपूर्ति बाधित चल रही है।

    • बाब-अल-मंदेब: वैश्विक तेल प्रवाह का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है।

    • बड़ा खतरा: यदि दोनों रणनीतिक मार्ग पूरी तरह बंद हो जाते हैं, तो दुनिया की कुल तेल और गैस आपूर्ति का 30 प्रतिशत प्रवाह ठप हो जाएगा, जिससे अभूतपूर्व महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।

    सऊदी अरब के तेल निर्यात पर पड़ेगा सीधा असर

    ईरान के साथ बढ़ते तनाव के कारण सऊदी अरब होर्मुज मार्ग का जोखिम उठाने के बजाय अपनी 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' के जरिए तेल को लाल सागर तक पहुंचाकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेज रहा था। हूतियों द्वारा लाल सागर के मुहाने पर स्थित बाब-अल-मंदेब को निशाना बनाए जाने से सऊदी अरब का यह वैकल्पिक निर्यात मार्ग भी पूरी तरह कट जाएगा।

    अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी कंपनियों में हड़कंप

    गाजा संघर्ष के दौरान भी हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में लगभग 100 वाणिज्यिक जहाजों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया था। अब नई नाकेबंदी की धमकी के बाद अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी (शिपिंग) कंपनियों और वैश्विक समुदाय की चिंताएं चरम पर पहुंच गई हैं। यदि जहाजों को अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' मार्ग से घूमकर जाना पड़ा, तो माल भाड़ा और समुद्री परिवहन की लागत में कई गुना बढ़ोतरी तय है।

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