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    मध्यप्रदेश को मिलेगी नई पहचान, ग्वालियर में आकार लेगा पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन

    ग्वालियर: ग्वालियर-चंबल अंचल वैश्विक औद्योगिक मानचित्र पर अपनी एक नई और सशक्त पहचान बनाने के लिए तैयार है। राज्य सरकार की दूरदर्शी योजना के तहत ग्वालियर के साडा (SADA) क्षेत्र स्थित कुलैथ और सौजना गाँव में एक विशाल टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की स्थापना की जा रही है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में सरकार शुरुआती इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 1000 से 1500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी, जिसके दम पर क्षेत्र में लगभग 12,000 करोड़ रुपये का निजी औद्योगिक निवेश लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    देश का पाँचवाँ और प्रदेश का पहला हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स हब

    नोएडा, बेंगलुरु, श्रीपेरंबुदूर और तिरुपति की तर्ज पर बनने वाला यह केंद्र मध्य प्रदेश का पहला और देश का पाँचवाँ ऐसा विशिष्ट हाई-टेक जोन होगा। इसके लिए काउंटर मैग्नेट सिटी की करीब 100 एकड़ भूमि उद्योग नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को स्थानांतरित की जा रही है। 'प्लग एंड प्ले' मॉडल पर आधारित इस कैंपस में 5G-6G तकनीक, सेमीकंडक्टर चिप, स्मार्टफोन और ऑप्टिकल फाइबर के निर्माण व शोध के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा। डिक्सन, एरिक्सन और आईबीएम जैसी दिग्गज वैश्विक कंपनियाँ यहाँ अपना सेटअप लगाने में दिलचस्पी दिखा चुकी हैं।

    बेहतरीन कनेक्टिविटी और एक्सप्रेसवे से लॉजिस्टिक्स को मजबूती

    इस औद्योगिकीकरण को गति देने में प्रस्तावित आगरा-ग्वालियर ग्रीन कॉरिडोर एक्सप्रेसवे की अहम भूमिका होगी। इस एक्सप्रेसवे के बनने से आगरा और ग्वालियर के बीच का सफर महज 50 मिनट का रह जाएगा, जिससे तैयार माल को दिल्ली-एनसीआर के बाजारों और प्रमुख पोर्ट्स तक भेजना बेहद तेज और सुलभ हो जाएगा। इसके साथ ही, इस मैन्युफैक्चरिंग जोन में निर्बाध बिजली, पानी, हाई-स्पीड इंटरनेट और जल निकासी जैसी विश्वस्तरीय बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।

    हजारों युवाओं को मिलेंगे direct और indirect रोजगार के अवसर

    इस परियोजना के धरातल पर उतरने से स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों के बड़े अवसर पैदा होंगे। रिसर्च एंड डेवलपमेंट, चिप डिजाइनिंग, मोबाइल असेंबलिंग और सॉफ्टवेयर-हार्डवेयर क्षेत्रों में 3,000 से अधिक इंजीनियरों व तकनीशियनों को सीधी नौकरियां मिलेंगी। इसके अतिरिक्त लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट, सिक्योरिटी और मेंटेनेंस जैसे सहायक क्षेत्रों में 2,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे, जिससे अंचल की अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम मिलेगा।

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