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    फास्ट-ट्रैक कोर्ट पर अमित शाह का समर्थन, आंदोलन को लेकर विपक्ष को दी नसीहत

    नई दिल्ली। देश में नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के बढ़ते विवादों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों के निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट (त्वरित अदालतें) स्थापित करने के निर्णय का केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने जोरदार स्वागत किया है। गृह मंत्री ने इस फैसले को युवाओं के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक मील का पत्थर करार दिया है।

    युवाओं के भविष्य के लिए प्रतिबद्धता का प्रतीक: अमित शाह

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा कि युवाओं का कल्याण और उनका भविष्य सुरक्षित करना मोदी सरकार की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक में शामिल दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का यह फैसला सरकार के संकल्प को दर्शाता है। गृह मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ करेंगे, उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा कर सख्त से सख्त सजा दी जाएगी।

    प्रधानमंत्री ने दिए कड़े निर्देश

    इससे पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से देश के छात्रों को आश्वस्त किया कि युवाओं का हित उनके लिए सर्वोपरि है। उन्होंने जानकारी दी कि पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित की जा रही हैं और संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। प्रधानमंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

    विपक्ष के प्रदर्शन के बीच रविशंकर प्रसाद का पलटवार

    विपक्ष द्वारा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और संसद से लेकर सड़क तक किए जा रहे प्रदर्शनों के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी सरकार के कदम की सराहना की। उन्होंने विपक्षी रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार संसद में हर विषय पर सकारात्मक चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष का उद्देश्य केवल हंगामा और अराजकता फैलाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता गंभीर मुद्दों पर बहस करने के बजाय बिना सूचना के धरना देकर गैर-जिम्मेदाराना राजनीति कर रहे हैं।

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