नई दिल्ली। पेपर लीक विवाद को सुलझाने के लिए दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधियों के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता बिना किसी अंतिम निर्णय के बेनतीजा समाप्त हो गई। महज 10 मिनट चली इस संक्षिप्त बैठक में कुछ बुनियादी मांगों पर सहमति बनती जरूर दिखी, लेकिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुख्य बिंदु पर दोनों पक्ष अब भी आमने-सामने अड़े हुए हैं।
दो मांगों पर सरकार की सैद्धांतिक मंजूरी, आर्थिक मुआवजे का आश्वासन
बैठक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने संयुक्त रूप से बताया कि वार्ता का माहौल मिला-जुला रहा। उन्होंने जानकारी दी कि पेपर लीक के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के पीड़ित परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने तथा विरोध-प्रदर्शनों के दौरान छात्रों पर दर्ज की गई पुलिस एफआईआर (FIR) वापस लेने की मांगों पर सरकार ने सैद्धांतिक सहमति व्यक्त की है।
इस्तीफे की मांग पर अड़ा पक्ष, शनिवार शाम को होगी आर-पार की वार्ता
मुआवजे और मुकदमों की वापसी के बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी ने साफ कर दिया है कि उनका आंदोलन केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना समाप्त नहीं होगा। सीजेपी प्रवक्ताओं के अनुसार, सरकार ने मंत्री के इस्तीफे पर विचार करने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है। वहीं, पार्टी ने चेतावनी दी है कि इस मुख्य मांग से कम पर कोई समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। स्थिति को स्पष्ट करने के लिए शनिवार शाम एक बार फिर दोनों पक्षों के बीच निर्णायक दौर की बैठक बुलाई गई है।
सरकार ने सुनीं मांगें, जेपी नड्डा बोले- उच्च स्तर पर जारी है विचार-विमर्श
सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने पत्रकारों को बताया कि प्रतिनिधिमंडल द्वारा रखी गई तीन सूत्रीय मांगों (मंत्री का इस्तीफा, 1 करोड़ का मुआवजा और मुकदमों की वापसी) को ध्यानपूर्वक सुना गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इन सभी बिंदुओं पर शासन स्तर पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और जल्द ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे पर सरकार की ओर से फिलहाल कोई कड़ा रुख या आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।


