बैतूल: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के शाहपुर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाली डूडर-काजली बीट में पांच राष्ट्रीय पक्षी मोरों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस गंभीर घटना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए वन विभाग ने एक किसान को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि फसलों को पक्षियों से बचाने के नापाक इरादे से खेत में जहरीले मक्का के दाने बिखेरे गए थे, जिन्हें खाने से इन बेकसूर मोरों की जान चली गई।
कैसे हुआ इस दर्दनाक घटना का खुलासा?
शाहपुर के उप वनमंडलाधिकारी (SDO) उत्तम सिंह सरस्त्या ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि गत 17 जुलाई को स्थानीय ग्रामीणों से वन विभाग को सूचना मिली थी कि जंगल से सटे एक खेत में पांच मोर मृत अवस्था में पड़े हुए हैं।
तत्काल एक्शन: सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम बिना समय गंवाए तुरंत मौके पर पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया।
संदिग्ध दाने बरामद: जांच के दौरान खेत की मेड़ के पास मक्का के कुछ संदिग्ध और जहरीले दाने मिले, जिसके बाद विभाग ने इस मामले की तह तक जाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी।
फसल बचाने के लिए खेत में बिखेरे गए थे जहरीले दाने
वन विभाग की गहन जांच में यह अहम खुलासा हुआ कि जिस खेत में यह घटना हुई, वह मेंढाखेड़ा निवासी रतन आदिवासी का है, जिसे कांजी तालाब निवासी कमलेश आदिवासी ने बटाई या ठेके पर ले रखा था।
पूछताछ में कबूला जुर्म: कड़ाई से पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई कि आरोपी ने अपनी फसल को जंगली जीवों व पक्षियों के नुकसान से बचाने के लिए मक्का के दानों में खतरनाक जहर मिलाकर पूरे खेत में बिखेर दिया था।
मौत की वजह: वन विभाग के अनुसार, इन्हीं जहरीले दानों को चुगने की वजह से पांच मोरों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
न्यायालय में पेश किया गया आरोपी, वन्यजीव अधिनियम के तहत कार्रवाई
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने पूछताछ के दौरान भले ही यह सफाई दी हो कि उसका मकसद केवल अपनी फसल को बचाना था, लेकिन उसकी इस घोर लापरवाही और आपराधिक कृत्य के कारण देश के राष्ट्रीय पक्षी मोरों की जान चली गई।
उपलब्ध तमाम पुख्ता साक्ष्यों और बयानों के आधार पर आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
इसके बाद आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश कर दिया गया है।
वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस वीभत्स मामले की जांच अभी पूरी तरह जारी है। अधिकारी इस घटना से जुड़े अन्य सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की अमानवीय घटनाओं की पुनरावृत्ति को पूरी तरह से रोका जा सके।


