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    भोपाल मेट्रो को मिली रफ्तार, अब हर 15 मिनट में मिलेगी ट्रेन; 4 नई ट्रेनों को हरी झंडी

    भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सुभाष नगर से एम्स तक निर्मित प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो सेवाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) द्वारा दोनों ट्रैकों पर सिग्नलिंग सिस्टम को हरी झंडी दिए जाने के बाद मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने नया परिचालन शेड्यूल लागू कर दिया है। इसके तहत शनिवार से इस मार्ग पर एक के बजाय चार मेट्रो ट्रेनों का नियमित संचालन प्रारंभ हो गया है, जिससे यात्रियों के सफर समय और प्रतीक्षा समय में भारी कमी आई है।

    यात्रियों के समय की बचत और फेरों की संख्या में बढ़ोतरी

    नियमित समय-सारणी में किए गए सुधारों के बाद अब यात्रियों को स्टेशन पर लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। नई व्यवस्था के अंतर्गत पीक आवर्स के दौरान हर 15 मिनट के अंतराल पर मेट्रो सेवा उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि सामान्य समय में मेट्रो हर 30 मिनट में स्टेशन पहुंचेगी। चारों ट्रेनें मिलकर दिनभर में दोनों दिशाओं में 25-25 फेरे लगाते हुए कुल 50 ट्रिप पूरी करेंगी, जिससे दैनिक यात्रियों की आवाजाही पहले से कहीं अधिक सुलभ हो गई है।

    मेट्रो संचालन की नई समय-सारणी और प्रमुख विशेषताएं

    नई समय-सारणी के अनुसार सुबह की पहली मेट्रो सुभाष नगर स्टेशन से 9 बजे और एम्स स्टेशन से 9:30 बजे रवाना हो रही है। इसी प्रकार अंतिम मेट्रो सेवा शाम को सुभाष नगर से 6:30 बजे और एम्स से 7:00 बजे संचालित की जा रही है। सुबह 9 बजे से 10:30 बजे तथा शाम 5:30 बजे से 7 बजे तक के पीक आवर्स में व्यस्तता को देखते हुए ट्रेनों की आवृत्ति बढ़ाकर 15 मिनट कर दी गई है।

    एम्स आने-जाने वाले मरीजों और यात्रियों को बड़ी राहत

    इस विस्तार से विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एम्स आने वाले प्रदेश भर के मरीजों और तीमारदारों को सीधी राहत मिली है। जबलपुर से भोपाल आए यात्रियों ने प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि एम्स पहुंचने के लिए यह बेहद आरामदायक और सुलभ साधन बन गया है। समय पर ट्रेनें उपलब्ध होने से न केवल समय की बचत हो रही है बल्कि आवागमन में होने वाली असुविधा से भी मुक्ति मिली है।

    मेट्रो स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रण और दैनिक यात्रियों का अनुभव

    स्थानीय कामकाजी पेशेवरों और दैनिक यात्रियों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। पूर्व में सीमित फेरों के कारण स्टेशनों और बोगियों में भीड़ का सामना करना पड़ता था, परंतु चार ट्रेनों के एक साथ उतरने और फेरों की संख्या बढ़ने से भीड़ पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो गया है। मेट्रो प्रशासन का यह कदम भोपाल की शहरी परिवहन प्रणाली को अधिक आधुनिक और सहज बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।

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