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    पहली जीत का स्वाद चखते ही श्रेयस को मिली तारीफ, पूर्व खिलाड़ी के बयान ने खींचा ध्यान

    नई दिल्ली: जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले गए पहले टी20 मुकाबले में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सात विकेट से धमाकेदार जीत दर्ज की और तीन मैचों की इस सीरीज में 1-0 से महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर ली। यह जीत कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए व्यक्तिगत तौर पर बेहद खास और राहत भरी रही, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में पूर्ण कप्तान बनने के बाद यह उनकी पहली जीत है। इससे पहले उनकी अगुवाई में भारतीय टीम को आयरलैंड के खिलाफ 2-0 और इंग्लैंड के खिलाफ 4-0 से सीरीज में हार का सामना करना पड़ा था।

    ‘लंबे समय बाद मिली जीत, इसलिए खुशी स्वाभाविक है’—सदागोपन रमेश

    भारतीय टीम की इस जीत पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व भारतीय क्रिकेटर सदागोपन रमेश ने कहा कि भले ही कुछ क्रिकेट विशेषज्ञ जिम्बाब्वे पर मिली इस जीत को बहुत बड़ा नहीं मान रहे हों, लेकिन लगातार हार के लंबे सिलसिले के बाद यह सफलता टीम के लिए बड़ी राहत लेकर आई है।

    उन्होंने अपने बयान में कहा, 'कई लोग यह कह रहे हैं कि जिम्बाब्वे को हराने पर भारत को इतनी अधिक खुशी नहीं मनानी चाहिए। लेकिन जब टी20 क्रिकेट में लंबे समय से जीत का सूखा चल रहा हो, तो ऐसी स्थिति में साधारण जीत भी किसी बड़ी सौगात जैसी लगती है। कप्तान श्रेयस अय्यर निश्चित रूप से अब राहत की सांस ले रहे होंगे, क्योंकि उनकी कप्तानी में टीम लगातार हार झेल रही थी। शायद वह ऐसी मानसिक स्थिति में पहुंच चुके थे जहां किसी भी प्रतिद्वंद्वी टीम के खिलाफ एक जीत ही उनके लिए बहुत बड़ी राहत थी।'

    अंतरिम कोच वीवीएस लक्ष्मण के योगदान की सराहना

    पूर्व क्रिकेटर रमेश ने भारतीय टीम के अंतरिम मुख्य कोच वीवीएस लक्ष्मण की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि वीवीएस लक्ष्मण पूरी तरह से प्रशंसा के पात्र हैं। जब भी वह भारतीय टीम के मुख्य कोच की जिम्मेदारी संभालते हैं, टीम का प्रदर्शन अमूमन शानदार रहता है। उनके मार्गदर्शन में भारतीय टीम अक्सर विरोधी टीमों का सूपड़ा साफ (क्लीन स्वीप) कर देती है, जबकि इसके विपरीत कई बार मुख्य दौरों पर टीम खुद क्लीन स्वीप का शिकार हो रही होती है। ऐसे कठिन समय में टीम को हर हाल में जीत की दरकार थी, इसलिए जिम्बाब्वे के खिलाफ मिली यह जीत पूरी तरह जायज है।

    युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी ने रचा नया इतिहास

    इस मुकाबले में भारत की जीत के सबसे बड़े नायक और आकर्षण का केंद्र युवा विस्फोटक बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी रहे।

    • विश्व रिकॉर्ड: वैभव ने मात्र 18 गेंदों में तूफानी अर्धशतक जड़कर पुरुष अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने का एक नया और अनोखा विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।

    • तोड़ा सचिन का रिकॉर्ड: महज़ 15 वर्ष 118 दिन की अत्यंत कम उम्र में वैभव ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

    • सचिन तेंदुलकर ने वर्ष 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ फैसलाबाद टेस्ट मैच के दौरान 16 वर्ष 213 दिन की उम्र में अपने करियर का पहला अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक लगाया था, जिसे अब युवा वैभव सूर्यवंशी ने पीछे छोड़ दिया है।

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