कपास, बाजरा और ज्वार फसल अधिसूचित, प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान पर मिलेगा बीमा योजना का लाभ
अलवर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2026 की फसलों का बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। राज्य सरकार ने खरीफ 2026 से रबी 2026-27 तक दो फसल मौसमों के लिए योजना की अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना के अनुसार अलवर जिले में खरीफ 2026 के लिए कपास, बाजरा एवं ज्वार फसलों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत अधिसूचित किया गया है।
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक पी.सी. मीणा ने किसानों से निर्धारित समय सीमा के भीतर फसल बीमा कराने की अपील की है। उन्होंने बताया कि योजना के माध्यम से किसानों को सूखा, कम वर्षा, बाढ़, जलभराव, कीट एवं रोग सहित विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं से फसल को होने वाले नुकसान की स्थिति में योजना के प्रावधानों के अनुसार बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।
ऋणी किसान 29 जुलाई तक बैंक को दें फसल की जानकारी
संयुक्त निदेशक पी.सी. मीणा ने बताया कि केसीसी धारक ऋणी कृषकों का फसल बीमा संबंधित वित्तीय संस्था के माध्यम से किया जाएगा। ऐसे किसान 29 जुलाई 2026 तक केसीसी में सम्मिलित खसरा नंबरों में बोई गई फसलों की जानकारी संबंधित बैंक को उपलब्ध करा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि यदि किसान निर्धारित अवधि में बैंक को बोई गई फसल की जानकारी उपलब्ध नहीं कराते हैं, तो बैंक के पास पहले से उपलब्ध जानकारी के आधार पर फसल बीमा की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसलिए किसानों को अपनी फसल एवं खसरा नंबर से संबंधित जानकारी समय पर बैंक में सत्यापित कराने की सलाह दी गई है।
गैर-ऋणी और बटाईदार किसान यहां करा सकेंगे बीमा
गैर-ऋणी एवं बटाईदार किसान स्वैच्छिक आधार पर 31 जुलाई 2026 तक फसल बीमा करा सकते हैं। इसके लिए किसान अपने नजदीकी—
- केंद्रीय सहकारी बैंक
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
- वाणिज्यिक बैंक शाखा
- डाकघर
- जन सेवा केंद्र (CSC)
- अधिकृत बीमा एजेंट
- राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल
के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
कृषि विभाग के अनुसार गैर-ऋणी किसानों के लिए फसल बीमा कराने हेतु एग्री स्टैक आईडी का उपलब्ध होना आवश्यक है। अलवर जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन के लिए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड का चयन किया गया है।
कम वर्षा और प्राकृतिक आपदा से नुकसान पर मिलेगा सुरक्षा कवच
खरीफ 2026 के दौरान कम वर्षा अथवा प्रतिकूल मौसम के कारण बुवाई नहीं हो पाने की स्थिति में क्षेत्रीय दृष्टिकोण के आधार पर बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। इसके अतिरिक्त सूखा, लंबी शुष्क अवधि, बाढ़, जलभराव, कीट एवं रोग, भूस्खलन, बिजली गिरने से आग लगने, तूफान, ओलावृष्टि तथा चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली फसल हानि पर योजना के प्रावधानों के अनुसार बीमा दावा देय होगा।
कृषि विभाग ने बताया कि कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए छोड़ी गई फसल को भी विशेष परिस्थितियों में बीमा सुरक्षा मिलेगी। यदि फसल कटाई के बाद चक्रवात, चक्रवाती वर्षा, असामयिक वर्षा अथवा ओलावृष्टि से प्रभावित होती है, तो कटाई के बाद अधिकतम 14 दिनों तक व्यक्तिगत आधार पर जोखिम कवर उपलब्ध रहेगा।
नुकसान की सूचना 72 घंटे में देना जरूरी
फसल को नुकसान होने की स्थिति में किसान को घटना की जानकारी 72 घंटे के भीतर देना आवश्यक होगा। किसान कृषि रक्षक पोर्टल, हेल्पलाइन नंबर 14447, क्रॉप इंश्योरेंस ऐप अथवा संबंधित बैंक एवं कृषि विभाग के अधिकारियों को लिखित रूप में सूचना दे सकते हैं।
समय पर सूचना देने से प्रभावित फसल का सर्वे एवं बीमा दावा प्रक्रिया योजना के प्रावधानों के अनुसार आगे बढ़ाई जा सकेगी। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि फसल नुकसान की स्थिति में निर्धारित समय सीमा का विशेष ध्यान रखें।
गलत जानकारी या प्रीमियम जमा नहीं होने पर संस्था होगी जिम्मेदार
संयुक्त निदेशक ने बताया कि यदि कोई वित्तीय संस्था पात्र किसान का राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर पंजीकरण अथवा नामांकन नहीं करती है, प्रीमियम जमा नहीं करती है, पात्रता से कम प्रीमियम लेती है या फसल, बीमा इकाई, गांव अथवा बुवाई से संबंधित जानकारी गलत दर्ज करती है, तो ऐसी स्थिति में योजना के प्रावधानों के अनुसार देय बीमा दावे की जिम्मेदारी संबंधित वित्तीय संस्था की होगी।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे फसल बीमा की अंतिम तिथि का इंतजार न करते हुए समय रहते आवश्यक दस्तावेज एवं फसल संबंधी जानकारी के साथ आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।
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