इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में बुनियादी अधिकारों को लेकर चल रहे जनआंदोलन पर सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का विवादास्पद बयान सामने आया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी और मौतों का बचाव करते हुए कहा कि वे इन प्रदर्शनकारियों को भारत की तरह ही दुश्मन की श्रेणी में रखते हैं। रक्षा मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सुरक्षा बलों की गोलीबारी में दर्जनों बेगुनाह नागरिकों की जान जा चुकी है और भारत ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है।
मूलभूत सुविधाओं के लिए सड़कों पर उतरी जनता
PoK के रावलकोट और मीरपुर सहित कई क्षेत्रों में स्थानीय नागरिक रोजगार, सस्ती बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी बुनियादी जरूरतों को लेकर हफ्तों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा आंदोलन को कुचलने के लिए किए जा रहे बल प्रयोग से स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरक्षा बलों की सीधी फायरिंग, आंसू गैस और लाठीचार्ज के कारण अब तक 80 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
मीरपुर में हिंसा और अस्पतालों में बदहाली
स्थानीय निवासियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, मीरपुर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं। एंबुलेंस और उचित चिकित्सा सुविधाओं के अभाव के कारण स्थानीय लोगों को घायलों को खुद ही अस्पतालों तक पहुंचाना पड़ा। इस भारी दमनकारी नीति के बावजूद नागरिक अपनी मांगों को लेकर लगातार सड़कों पर डटे हुए हैं।
भारत ने दर्ज कराया कड़ा विरोध
भारत सरकार ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में निर्दोष नागरिकों पर हो रहे अत्याचारों और मानवाधिकार उल्लंघनों की कड़े शब्दों में निंदा की है। भारत ने पाकिस्तान पर मौलिक अधिकारों के हनन का गंभीर आरोप लगाते हुए वहां की राजनीतिक प्रक्रियाओं को पूरी तरह से दिखावटी करार दिया है। इसके साथ ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान की इन हिंसक कार्रवाइयों का संज्ञान लेने का आह्वान किया है।


