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    कमिश्नरी कोर्ट की राहत के बाद ट्रस्ट ने हाईकोर्ट में याचिका वापस लेकर बदली रणनीति

    रामपुर| उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में स्थित विख्यात मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को ढहाए जाने के प्रशासन के आदेश के विरुद्ध इलाहाबाद उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) में ट्रस्ट द्वारा दायर की गई याचिका को बुधवार को औपचारिक रूप से वापस ले लिया गया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से न्यायालय को अवगत कराया गया कि इसी प्रकरण से संबंधित कमिश्नरी न्यायालय में दायर अपील पर पूर्व में ही अंतरिम राहत यानी स्थगन आदेश प्राप्त हो चुका है। ऐसी स्थिति में उच्च न्यायालय में लंबित इस याचिका का औचित्य समाप्त हो गया है, जिसके फलस्वरूप इसे वापस लिए जाने की अनुमति प्रदान की जाए। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की संयुक्त खंडपीठ ने इस मामले की संपूर्ण सुनवाई की।

    ध्वस्तीकरण आदेश को दी गई थी चुनौती

    मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट एवं अन्य की तरफ से दाखिल की गई मूल याचिका में रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा 15 जुलाई 2026 को जारी किए गए उस विवादास्पद आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके अंतर्गत विश्वविद्यालय परिसर की कुल 40 में से 38 इमारतों को ध्वस्त करने के निर्देश पारित किए गए थे। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से गुहार लगाई थी कि इस ध्वस्तीकरण आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए तथा मामले में अंतिम निर्णय आने तक किसी भी प्रकार की विध्वंस कार्रवाई पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।

    याचिका में इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया गया था कि वर्तमान समय में इस शिक्षण संस्थान के भीतर कुल 1,205 छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और लगभग 162 शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक कर्मचारी अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। यदि इन भवनों को गिराया जाता है, तो इससे मासूम विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनके उज्ज्वल भविष्य पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, साथ ही वहाँ कार्यरत कर्मचारियों की आजीविका का संकट भी खड़ा हो जाएगा।

    मुरादाबाद कमिश्नर कोर्ट से मिल चुकी है अंतरिम राहत

    इस कानूनी मुकदमे में राज्य सरकार, मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर, रामपुर विकास प्राधिकरण, जिला पंचायत रामपुर के अपर मुख्य अधिकारी और क्षेत्र पंचायत सैदनगर को पक्षकार (प्रतिवादी) बनाया गया था। हालाँकि, अपीलीय अदालत से अंतरिम सुरक्षा और स्थगन आदेश मिलने के पश्चात ट्रस्ट ने उच्च न्यायालय से अपनी याचिका वापस ले ली।

    उल्लेखनीय है कि मुरादाबाद के कमिश्नर न्यायालय ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने से संबंधित आदेश पर गत 27 जुलाई 2026 को ही अंतरिम रोक लगा दी थी। यह पूरी कार्रवाई रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा भवनों के मानचित्र (नक्शे) स्वीकृत न होने के आधार पर प्रस्तावित की गई थी, जिस पर अब कानूनी मोर्चे पर विराम लगता नजर आ रहा है।

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