गठबंधन से बाहर रखकर होर्मुज पर यूरोप की पहल, ट्रंप के लिए नई चुनौती
तेहरान। डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के साथ जारी तनाव के बीच बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अमेरिका के करीबी रहे यूरोपीय सहयोगी अब अलग राह पर चलते नजर आ रहे हैं।
यूरोपीय देशों ने दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा के लिए एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की योजना तैयार की है। इस पहल का उद्देश्य युद्ध के बाद इस जलमार्ग को सुरक्षित और सुचारु बनाना है।
सबसे अहम बात यह है कि इस प्रस्तावित गठबंधन में अमेरिका को शामिल नहीं किया गया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्पष्ट किया कि यह एक रक्षात्मक मिशन होगा, जिसमें अमेरिका, इजराइल और ईरान जैसे युद्धरत देशों को शामिल नहीं किया जाएगा।
इस योजना के पीछे ब्रिटेन और फ्रांस प्रमुख भूमिका में हैं। यूरोपीय देशों का उद्देश्य शिपिंग कंपनियों में भरोसा कायम करना है कि युद्ध के बाद होर्मुज मार्ग सुरक्षित रहेगा।
योजना के तहत समुद्री माइन्स हटाने और युद्धपोत तैनात करने की रणनीति बनाई गई है। वर्तमान में क्षेत्र में जहाजों पर हमलों और माइनिंग का खतरा बढ़ा हुआ है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
चूंकि दुनिया का लगभग 20% तेल इस मार्ग से गुजरता है, इसलिए यूरोप अपनी आर्थिक सुरक्षा को लेकर चिंतित है। इस बीच जर्मनी ने भी इस मिशन में शामिल होने के संकेत दिए हैं, जिसे उसकी सैन्य नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ शांति वार्ता की कोशिश में जुटा है। संकेत हैं कि पाकिस्तान की मेजबानी में तेहरान के साथ वार्ता का अगला दौर हो सकता है। हालांकि, पहले दौर की विफलता और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी से सहयोगियों में असंतोष देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप का यह कदम अमेरिकी नेतृत्व और वैश्विक साख के लिए बड़ी चुनौती है। बदलते भू-राजनीतिक हालात में यह पहल वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है।
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