More
    HomeTagsJeevan mantra

    Tag: jeevan mantra

    अमिट है कर्म का फल

    यदि कर्म का फल तुरंत नहीं मिलता है तो यह नहीं समझना चाहिए कि उसके भले-बुरे परिणाम से हम सदा के लिए बच गये। कर्मफल ऐसा अमिट तथ्य है जो आज नहीं तो कल भुगतना ही पड़ेगा। कभी-कभी परिणाम में देर इसलिए होती है...

    सच्चे ज्ञानी की विशेषता

    व्यक्ति सत्संगति से तीन वस्तुओं को-शरीर, शरीर का स्वामी या आत्मा तथा आत्मा के मित्र को- एक साथ संयुक्त देखता है, वही सच्चा ज्ञानी है। जब तक आध्यात्मिक विषयों के वास्तविक ज्ञाता को संगति नहीं होती, वे अज्ञानी हैं, वे केवल शरीर को देखते...

    अपनेपन का प्रेम ही होता है सबसे सच्चा प्रेम

    जब प्रेम बहुत गहरा होता है, तब तुम किसी भी गलतफहमी के लिए पूरी जिम्मेवारी लेते हो। पल भर के लिए ऊपरी तौर से नाराजगी व्यक्त कर सकते हो, परन्तु जब इस नाराजगी को दिल से महसूस नहीं करते, तब तुम एक-दूसरे को अच्छी...

    प्रधानता आत्मा को

    मनुष्य सामान्यत: जो बाह्य में देखता, सुनता, समझता है वह यथार्थ ज्ञान नहीं होता। किन्तु भ्रमवश उसी को यथार्थ ज्ञान मान लेता है।   अवास्तविक ज्ञान को ही ज्ञान समझकर और उसके अनुसार अपने कार्य करने केकारण मनुष्य अपने मूल उद्देश्य सुख-शान्ति की दिशा में...

    निष्ठा और सत्य

    निष्ठा अविभाजित मन, अविभाजित चेतना का स्वभाव है। ईश्वर में तुम्हारी निष्ठा है, उसे जानने का प्रयत्न मत करो। आत्मा में तुम्हारी निष्ठा है, उसे जानने का प्रयत्न मत करो। जिसमें भी तुम्हारी निष्ठा है, उसे जानने की कोशिश न करो। बच्चे को मां...