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    Tag: jeevan mantra

    प्रधानता आत्मा को

    मनुष्य सामान्यत: जो बाह्य में देखता, सुनता, समझता है वह यथार्थ ज्ञान नहीं होता। किन्तु भ्रमवश उसी को यथार्थ ज्ञान मान लेता है।   अवास्तविक ज्ञान को ही ज्ञान समझकर और उसके अनुसार अपने कार्य करने केकारण मनुष्य अपने मूल उद्देश्य सुख-शान्ति की दिशा में...

    निष्ठा और सत्य

    निष्ठा अविभाजित मन, अविभाजित चेतना का स्वभाव है। ईश्वर में तुम्हारी निष्ठा है, उसे जानने का प्रयत्न मत करो। आत्मा में तुम्हारी निष्ठा है, उसे जानने का प्रयत्न मत करो। जिसमें भी तुम्हारी निष्ठा है, उसे जानने की कोशिश न करो। बच्चे को मां...