आदिवासी क्षेत्र में अज्ञात बीमारी पर जूली ने सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था व मनरेगा पर उठाए सवाल
धरियावद/प्रतापगढ़। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने वागड़ क्षेत्र के दौरे के दौरान आदिवासी इलाकों में अज्ञात बीमारी से मासूम बच्चों की मौत को हृदयविदारक बताते हुए प्रदेश सरकार पर संवेदनहीनता के आरोप लगाए। उन्होंने धरियावद के लालपुरा गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उनका दुख साझा किया।
मीडिया से बातचीत करते हुए जूली ने कहा कि लसाड़िया और धरियावद जैसे पिछड़े क्षेत्रों में लगातार मासूमों की जान जा रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अब तक बीमारी के कारणों का पता लगाने में असफल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के पद रिक्त हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने मौके से ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की सचिव गायत्री राठौर से दूरभाष पर बात कर क्षेत्र की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया और त्वरित कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद सत्ता पक्ष का कोई भी जिम्मेदार नेता पीड़ित परिवारों को सांत्वना देने तक नहीं पहुंचा, जो सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अब तक प्रभावित परिवारों को मुख्यमंत्री सहायता कोष से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है।
जूली ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय चिरंजीवी योजना के तहत गंभीर परिस्थितियों में आर्थिक सहायता का प्रावधान था, लेकिन वर्तमान सरकार आमजन को उनके हाल पर छोड़ रही है।
दौरे के अगले चरण में वे प्रतापगढ़ में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित ‘संगठन बढ़ाओ, लोकतंत्र बचाओ’ अभियान के तहत मनरेगा कार्यशाला में शामिल हुए। यहां उन्होंने कहा कि सरकार ने योजना का नाम बदल दिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर मनरेगा कमजोर हो रही है। श्रमिकों को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल रहा और उन्हें मजदूरी के लिए भटकना पड़ रहा है।
पंचायतीराज एवं निकाय चुनावों को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि भाजपा सरकार हार के डर से समय पर चुनाव नहीं करा रही है, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।
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