वैश्विक चुनौतियों के बीच 7% विकास दर और वित्तीय अनुशासन का संदेश देता बजट
मिशनसच न्यूज, अलवर। केंद्रीय वित्त मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2026-27 (अप्रैल 2026 से मार्च 2027) के लिए पेश किए गए बजट में यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर सवार होकर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। वैश्विक भू-राजनैतिक हलचलों और अनिश्चितताओं के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था 7 प्रतिशत की मजबूत रफ्तार से आगे बढ़ रही है। ट्रम्प टैरिफ, ईरान पर अमेरिकी हमले और भारत-ईयू व्यापार समझौते जैसे मुद्दों के बीच यह मजबूती आम आदमी के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है।
राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय, अलवर के प्राचार्य एवं अर्थशास्त्र के प्रोफेसर प्रो.(डॉ.) सत्य भान यादव ने कहा कि इस बजट का मुख्य उद्देश्य विकसित भारत @2027 के लक्ष्य को साकार करना है। इसके लिए वित्तीय अनुशासन, दीर्घकालिक समावेशी विकास, आर्थिक स्थिरता, महंगाई नियंत्रण, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने पहली बार तीन प्रमुख कर्तव्यों—आर्थिक विकास को गति देना, आमजन की अपेक्षाओं को पूरा करना और सभी को विकास में भागीदार बनाना—का स्पष्ट निर्धारण किया है। ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत के तहत कृषि, पशुपालन और शिक्षा क्षेत्रों के लिए ₹1,62,671 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
बजट में किसानों के लिए एआई आधारित “भारत विस्तार” टूल, दूध व पोल्ट्री क्षेत्र के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी और नई पशु चिकित्सा शिक्षा सुविधाओं की घोषणा की गई है। साथ ही उच्च मूल्य वाली खेती जैसे नारियल और चंदन को प्रोत्साहित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
शिक्षा क्षेत्र में भी रिकॉर्ड वृद्धि करते हुए स्कूल एवं उच्च शिक्षा के लिए ₹1,39,289 करोड़ का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9 प्रतिशत अधिक है। इससे शिक्षा पर जीडीपी के 6 प्रतिशत खर्च के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में मजबूती मिलेगी। बजट में एआई लैब, गर्ल्स हॉस्टल, स्किलिंग, पांच नए यूनिवर्सिटी टाउनशिप और विदेशी शिक्षा पर टीसीएस को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत करने जैसे महत्वपूर्ण कदम शामिल हैं।
राजकोषीय अनुशासन की बात करें तो वित्त मंत्री ने संशोधित अनुमान 2025-26 में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.4 प्रतिशत और बजट अनुमान 2026-27 में इसे 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था का संकेत माना जा रहा है।
हालांकि, प्रो. यादव ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं पर अभी और अधिक खर्च किए जाने की आवश्यकता है, क्योंकि यह अभी भी जीडीपी के 3 से 4 प्रतिशत के आसपास ही है। सात रेलवे कॉरिडोर की घोषणा को उन्होंने सराहनीय कदम बताया, लेकिन व्यक्तिगत करदाताओं को प्रत्यक्ष करों में राहत न मिलना बजट की एक कमी भी बताया।
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