अलवर के युसूफ खां मेवाती को आज देश ही नहीं विदेश के लोग भी पसंद कर रहे हैं। कारण है यूसुफ ने परिवार से मिली विरासत को संजोकर एक नए आयाम तक पहुंचाया है। अपने दादा व पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए युसूफ अभी तक 25 से ज्यादा विदेशी धरती पर अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं
मिशन सच न्यूज़, अलवर। शहर के मूंगस्का निवासी युसूफ खां मेवाती को आज देश ही नहीं विदेश के लोग भी पसंद कर रहे हैं। कारण है यूसुफ ने परिवार से मिली विरासत को संजोकर एक नए आयाम तक पहुंचाया है। अपने दादा व पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए युसूफ अभी तक 25 से ज्यादा विदेशी धरती पर अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। उनकी इस कला को लोगों का भरपूर प्यार मिला। अलवर से निकली भपंग की कला अब विदेशी लोगों को काफी पसंद आ रही है। इसी कला को अब अलवर के युसूफ जापान के टोक्यो शहर में प्रदर्शित कर रहे हैं। यूसुफ 27 सितम्बर को जापान के टोक्यो में भपंग व खड़ताल की कला की प्रस्तुति देंगे।
लोक कलाकार युसूफ खां मेवाती ने बताया कि उन्हें भपंग की कला विरासत में मिली है। इस कला को प्रदर्शित करने वाले वे परिवार की 20वीं पीढ़ी के सदस्य है। विरासत में भपंग की कला मिलने के बाद उन्होंने इसे आगे ले जाने में पूरी मेहनत लगाई। इसी का नतीजा है कि वह अपने दादा व पिता के बाद राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान पा चुके हैं। उन्होंने बताया कि वे फिलहाल जापान के टोक्यो में अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले वे करीब 25 देशों में भपंग कला की प्रस्तुति दे चुके हैं। इनमें पुर्तगाल, स्विट्ज़रलैंड, पोलैंड, दोहा, जर्मनी, बेल्जियम, नेपाल, बहरीन, हांगकांग सहित अन्य देश शामिल है। उन्होंने बताया कि विदेशों में इस कला को बहुत प्यार व सम्मान मिलता है, जिसके चलते कलाकार बेहतर परफॉर्म कर पाते हैं।
जापान के टोक्यो में करेंगे भपंग व खड़ताल का प्रदर्शन
लोक कलाकार व भपंग वादक युसूफ खान मेवाती ने बताया कि फिलहाल वे जापान में भपंग व खड़ताल की कला को प्रदर्शित कर रहे हैं। इस कार्यक्रम के लिए विदेश मंत्रालय की ओर से उन्हें जापान भेजा गया है। उन्होंने बताया कि भारत से पांच कलाकारों का ग्रुप अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए जापान भेजा गया है। जो सभी अलग— अलग जगहों से है। यूसुफ ने बताया कि 2 दिन पहले उन्होंने जापान के इंडियन एंबेसी में भपंग व खड़ताल की प्रस्तुति दी। इस दौरान लोगों को उनके ग्रुप की परफॉर्मेंस काफी पसंद आई। शनिवार को भारत से गया यह ग्रुप टोक्यो में भारत का प्रतिनिधित्व कर अपनी कला का प्रदर्शन करेगा।
भपंग की कला से मिली परिवार को पहचान
लोक कलाकार यूसुफ खां मेवाती ने बताया कि भपंग से उनके परिवार को पहचान मिली। इस कला को उनके दादा ने करीब 75 देशों में प्रदर्शित किया था। यूसुफ के पिता भी करीब 44 देशों में भपंग वादन कर चुके हैं। अब इसी कला को युसूफ आगे बढ़ा रहे हैं। यूसुफ ने बताया कि इसी कला के चलते पिता व दादा को नेशनल अवार्ड मिला था। वहीं इस कला को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के चलते यूसुफ को भी 2024 में नेशनल अवार्ड सहित विभिन्न अवार्ड मिल चुके हैं।
क्या है भपंग कला
भपंग वादक यूसुफ ने बताया कि भपंग एक भारतीय पारंपरिक वाद्य यंत्र है। जिसे लोक संगीत में प्रयोग किया जाता है। यह एक एकतारी वाद्य यंत्र है, इसमें केवल एक ही तार होता है। इसे डमरू जैसे छोटे नगाड़े की तरह बनाया जाता है, जिसके ऊपर चमड़े की झिल्ली होती है। इस झिल्ली से एक तार जुड़ा होता है और उस तार को खींचने या ढीला करने से इसकी आवाज़ में बदलाव आता है। इसे बजाने वाला कलाकार हाथ से झिल्ली पर हल्की थपकी देता है और साथ ही तार को खींचकर या ढीला छोड़कर अलग-अलग सुर पैदा करता है।


