सरिस्का को पर्यटन हब बनाने की मांग, भर्तृहरि मेले की तैयारियों पर अफसरों को चेताया, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से इस्तीफे की मांग
अलवर। नेता प्रतिपक्ष एवं अलवर ग्रामीण विधायक टीकाराम जूली ने भर्तृहरि मेले की तैयारियों, अलवर में पर्यटन विकास और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अलवर में रोजगार और आजीविका के नए अवसर बढ़ाने के लिए पर्यटन क्षेत्र को मजबूत करना आवश्यक है। सरकार को सरिस्का के विकास के लिए ठोस योजना बनाकर इसे एक प्रमुख पर्यटन हब के रूप में विकसित करना चाहिए।
मीडिया से बातचीत में जूली ने कहा कि खैरथल-तिजारा और भिवाड़ी क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, लेकिन अलवर जिले में रोजगार और आर्थिक विकास के लिए पर्यटन की संभावनाओं को भी गंभीरता से आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि सरिस्का अलवर की प्रमुख पहचान और पर्यटन की सबसे बड़ी संभावनाओं में से एक है।
सरिस्का को विकसित करना जरूरी
जूली ने कहा कि यदि सरिस्का का योजनाबद्ध तरीके से विकास नहीं किया गया तो अलवर में पर्यटन से होने वाली आय और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर सीमित रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बेहतर सड़कें, सुगम आवागमन, आधारभूत सुविधाएं और दीर्घकालिक पर्यटन नीति जरूरी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में कई मार्गों की स्थिति खराब है और सरकार के पास पर्यटन विकास को लेकर स्पष्ट एवं प्रभावी कार्ययोजना नजर नहीं आ रही। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र को मजबूत करने से होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार, गाइड सेवा और अन्य गतिविधियों के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को आजीविका के अवसर मिल सकते हैं।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर भी निशाना साधा और उनके इस्तीफे की मांग की। जूली ने कहा कि शिक्षा मंत्री को शिक्षा से जुड़े मुद्दों, स्कूलों की स्थिति, रिक्त पदों और विद्यार्थियों की समस्याओं पर गंभीरता से काम करना चाहिए। उन्होंने बच्चों पर लाठीचार्ज को लेकर शिक्षा मंत्री के कथित बयान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस प्रकार की टिप्पणियां सरकार की संवेदनशीलता पर प्रश्न खड़े करती हैं।
जूली ने दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में करीब साढ़े 12 लाख बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया है और शिक्षा विभाग में डेढ़ लाख से अधिक पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा कि रिक्त पदों को समय पर नहीं भरने से स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है और विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षा विभाग में रिक्त पदों को प्राथमिकता से भरना चाहिए और सरकारी स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना चाहिए। एक स्कूल भवन गिरने की घटना में सात बच्चों की मौत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय और प्रभावित स्कूल के पुनर्निर्माण को लेकर सरकार को जवाब देना चाहिए।
भर्तृहरि मेले की तैयारियों की समीक्षा
टीकाराम जूली ने लोकदेवता भर्तृहरि महाराज के आगामी मेले की तैयारियों और आमजन से जुड़े मुद्दों को लेकर मिनी सचिवालय स्थित जिला कलेक्टर सभागार में विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों की समीक्षात्मक बैठक ली। उन्होंने बताया कि मेले से जुड़े बिजली, पेयजल, पंचायत राज और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के कार्यों के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। कार्यों को समय पर पूरा कराने के लिए समय-सीमा भी निर्धारित की गई है।
लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए जूली ने प्रशासन को चेताया कि किसी भी स्तर पर अव्यवस्था या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने मेले में साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, अस्थायी शौचालय, चिकित्सा शिविर, एम्बुलेंस और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की।
यातायात, पार्किंग और सुरक्षा पर जोर
जूली ने मेले के दौरान संभावित भारी भीड़ को देखते हुए वैकल्पिक मार्गों, पार्किंग स्थलों और पुलिस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराने के लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने सावन माह और बरसात के मौसम को देखते हुए आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर भी जोर दिया। जलभराव, टूटी सड़कों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी आपातकालीन व्यवस्थाओं को समय रहते दुरुस्त करने की आवश्यकता बताई।
बिजली, पानी और सड़कों की समस्याओं पर नाराजगी
बैठक में नेता प्रतिपक्ष ने बिजली कटौती, सड़कों के गड्ढों, पेयजल संकट, राशन वितरण और ग्रामीण क्षेत्रों में अधूरे विकास कार्यों को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आमजन की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए। जूली ने कहा, “भर्तृहरि महाराज का मेला हमारी आस्था और अलवर की पहचान है। प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं। सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाएं समय पर मिलें।
” उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी विभाग ने लापरवाही की या कार्यों को फाइलों में लंबित रखा तो संबंधित स्तर पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए। जनता की समस्याओं को बहाने बनाकर टालना स्वीकार नहीं किया जाएगा। जूली ने कहा कि भर्तृहरि मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अलवर की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और जिले की छवि से भी जुड़ा है। इसलिए सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करते हुए स्पष्ट एक्शन प्लान तैयार करना चाहिए।
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