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    अलवर में टाइगर मैराथन पर खुशी, वन्यजीवों के बीच नीलगाय संरक्षण की उठी मांग

    सरकार से अपील — बाघों के साथ नीलगाय सुरक्षा पर भी बने ठोस नीति, आंदोलनकारी संगठनों ने सौंपे ज्ञापन

    अलवर।  पहली बार आयोजित इंटरनेशनल टाइगर हाफ मैराथन के सफल आयोजन पर जहां वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण संगठनों ने खुशी जताई है, वहीं राजस्थान नीलगाय रक्षा आंदोलन से जुड़े संगठनों ने राज्य सरकार से बाघों की तरह नीलगायों के संरक्षण के लिए भी प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

    आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव, वन्य राज्य मंत्री संजय शर्मा और डिप्टी सीएम व पर्यटन मंत्री दीया कुमारी द्वारा बाघों की सुरक्षा और उनकी संख्या बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। अलवर में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय मैराथन ने वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम किया है, लेकिन अन्य वन्य प्राणियों की अनदेखी चिंता का विषय है।

    राजस्थान नीलगाय रक्षा आंदोलन के ओमप्रकाश गुप्ता ने बयान जारी करते हुए कहा कि जब बाघों के संरक्षण के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं और देश-विदेश से हजारों धावकों को जोड़कर अभियान चलाया जाता है, तब नीलगाय जैसे बेजुबान वन्यजीवों के लिए भी समान संवेदनशीलता दिखाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि नीलगाय भी प्रकृति का अहम हिस्सा हैं और उन्हें भी जीने का अधिकार मिलना चाहिए।

    उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों को नीलगायों की प्राण रक्षा के लिए 25 से अधिक ज्ञापन, रजिस्टर्ड डाक, ई-मेल तथा प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से मांग पत्र भेजे जा चुके हैं। केंद्रीय मंत्री को भी दिल्ली स्थित आवास पर ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन अब तक नीलगायों के शिकार अथवा हत्या से जुड़े कानून में कोई ठोस बदलाव नहीं किया गया है।

    आंदोलनकारियों का कहना है कि पर्यावरण संतुलन के लिए केवल बाघ ही नहीं, बल्कि हर वन्यजीव का अस्तित्व जरूरी है। पहाड़, जंगल और वन्य प्राणी मिलकर ही पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाते हैं। ऐसे में फसल सुरक्षा के नाम पर नीलगायों की हत्या जैसी व्यवस्था अमानवीय है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए।

    संगठनों ने सरकार से मांग की है कि नीलगायों के संरक्षण के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए, शिकार पर सख्त रोक लगे और इनके सुरक्षित आवास सुनिश्चित किए जाएं, ताकि प्रदेश में वन्यजीवों के प्रति समान संरक्षण का संदेश जाए।

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