हरियालो अलवर अभियान के तहत मियावाकी फॉरेस्ट विकसित करने को लेकर जिला कलक्टर ने अधिकारियों को दिए निर्देश
अलवर। अलवर शहर को हरित, स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक बड़ी पहल की है। जिला कलक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक आयोजित की गई, जिसमें ‘हरियालो अलवर’ अभियान के तहत शहर में 50 मियावाकी मिनी फॉरेस्ट विकसित करने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों, सामाजिक संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिला कलक्टर ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य शहर के खाली सार्वजनिक स्थलों को जनभागीदारी के माध्यम से हरे-भरे क्षेत्रों में बदलना है।
उन्होंने कहा कि पार्कों, विद्यालयों, महाविद्यालयों, कॉलोनियों, पर्यटन स्थलों और अन्य उपयुक्त स्थानों का चयन कर वहां मियावाकी तकनीक के माध्यम से पौधारोपण किया जाएगा। प्रत्येक स्थान पर लगभग तीन हजार पौधे लगाए जाएंगे। इस प्रकार 50 स्थानों पर करीब डेढ़ लाख पौधों का रोपण किया जाएगा।
डॉ. आर्तिका शुक्ला ने नगर विकास न्यास (यूआईटी) और नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के पहले चरण में आगामी तीन दिनों के भीतर संभावित स्थानों का चयन कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि इन मिनी फॉरेस्ट के संरक्षण और देखभाल में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों का भी सहयोग लिया जाएगा।
क्या है मियावाकी पद्धति?
मियावाकी तकनीक जापान के प्रसिद्ध वनस्पति वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित की गई थी। इस पद्धति में स्थानीय प्रजातियों के पौधों को अत्यधिक घनत्व के साथ लगाया जाता है। सामान्यतः एक वर्गमीटर क्षेत्र में तीन से पांच पौधे लगाए जाते हैं।
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कम समय में घने और आत्मनिर्भर वन विकसित हो जाते हैं। इससे जैव विविधता बढ़ती है, कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर कम होता है और वायु गुणवत्ता में सुधार आता है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में बढ़ते तापमान और प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी सहायता मिलती है।
जिला कलक्टर ने सभी नागरिकों, सामाजिक संगठनों, औद्योगिक इकाइयों और शिक्षण संस्थानों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पौधारोपण के साथ-साथ पौधों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
बैठक में नगर विकास न्यास की सचिव धाईगुडे स्नेहल नाना, नगर निगम आयुक्त सोहन सिंह नरूका, यूआईटी के भूमि अवाप्ति अधिकारी जितेंद्र सिंह नरूका, यूआईटी के अधीक्षण अभियंता योगेंद्र कुमार, रीको के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक परेश सक्सेना सहित कई अधिकारी एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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